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Ujjain: सिंहस्थ महाकुम्भ की तैयारी: 'एकता मॉल' बनेगा देश की विविध कलाओं और शिल्प का संगम केंद्र

By मुकेश मिश्रा | Updated: April 11, 2026 13:04 IST

Ujjain: इसके अलावा 2 मल्टीप्लेक्स थिएटर (प्रत्येक 250 बैठक), 27 फ़ूड ज़ोन शॉप्स, 3 रेस्टोरेंट, 2 गेम ज़ोन और 1200 वर्गफुट का “मिलेट लोक” बन रहा है, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों के मिनीबॉउल अनाज‑आधारित व्यंजन पेश किया जाना संभावित है।

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Ujjain:उज्जैन के हरिफाटक रोड पर अब जिस जगह पहले खुले मैदान और छोटे‑मोटे व्यापारिक फैलाव दिखते थे, वहाँ तीव्र गति से खड़ा हो रहा है “पी.एम. एकता मॉल” – एक ऐसा भव्य वाणिज्यिक‑सांस्कृतिक केंद्र जिसे राज्य और देश‑भर की विविधताओं को एक ही छत के नीचे जोड़ने का दावेदार ठहराया जा रहा है। यह मॉल 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुम्भ के दौरान न सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए रोक‑थाम‑स्थल बल्कि एक नया सांस्कृतिक चिह्न बनने की तैयारी में है। “एक भारत” की खोजी वास्तुलगभग 3.2 हेक्टेयर भूमि पर बन रहे इस मॉल का कुल निर्माण‑क्षेत्र 5.50 लाख वर्गफुट है, और इसकी लागत लगभग 284 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यहाँ खास बात यह है कि इमारत के लिए सिर्फ आधुनिक शॉपिंग‑मॉल की बजाय श्री महाकाल महालोक की वास्तुकला और ताम्र‑पाषाण‑शैली के अवशेषों के बीच का संगम तराशा जा रहा है। मुख्य प्रवेश द्वार 60 फीट ऊँचा होगा, जो जैसलमेर येलो सैंडस्टोन से निर्मित है; प्रवेश के दोनों किनारे दो 12×12 फीट की पिंक सैंडस्टोन की नंदी आकृतियाँ भी लगाई जा रही हैं।मुख्य द्वार के ठीक सामने 28 फीट ऊँचा कांस्य अशोक स्तंभ और उसके आसपास देश के हर राज्य के प्रतीक‑स्तंभों का ब्लॉक बनाया जा रहा है – यह वास्तुतः “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की राजनीतिक‑सांस्कृतिक छवि को कंक्रीट में बदलने की कोशिश का हिस्सा लगता है।एक छत के नीचे तीन सौ ज़िले

मॉल के लिए देश के प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश के लिए 1050 वर्गफुट की 36 दुकानें आरक्षित हैं, जहाँ राज्य‑विशिष्ट उत्पाद, हस्तशिल्प और जीआई टैग वाली चीज़ों को बेचने की योजना बनाई गई है। यह सरकारी ओडीओपी (एक शहर एक उत्पाद ) योजना के ढांचे से मिलता‑जुलता लगता है, जिसके ज़रिए छोटे कारीगरों और उत्पादकों को शहरी और राष्ट्रीय बाज़ार से जोड़ने का दावा किया जाता है।

मध्यप्रदेश के अपने ज़िलों के लिए 300 वर्गफुट की 55 दुकानें आवंटित की गई हैं, जहाँ बैतूल का चावल, खरगोन का कपास, खंडवा की फूली, चंदेरी की साड़ी जैसे उत्पादों को “प्रादेशिक ब्रांडिंग” के तहत बेचा जा सकता है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या छोटे उत्पादक इन दुकानों के किराए और ऑपरेटिंग लागत वहन कर पाएँगे, या यह जगह बड़े रिटेल चेन और फ्रैंचाइज़ी‑होल्डरों के लिए अधिक उपयोगी होगी।कला, आर्किटेक्चर और “मल्टीप्लेक्स भक्ति”

कन्वेंशन सेंटर की छत (फाल्स सीलिंग) पर भोपाल की “मधुबनी तकनीक”, अंध्र‑तमिल की “कलमकारी”, राजस्थान की “पिछवाई” और बंगाल की पट्टचित्र‑शैली जैसी चित्रकलाएँ लगाई जाने की योजना है। यह दृष्टि तो आकर्षक लगती है, लेकिन यहाँ भी यह जाँच ज़रूरी है कि क्या ये चित्रण असली कारीगरों के हाथों से बनाए जा रहे हैं, या डिजिटल प्रिंट और आयातित फैब्रिक‑स्टिकर के रूप में संकुचित हो गए हैं।

शॉपिंग और प्रार्थना के बीच की तालमेल को और मजबूत बनाने के लिए मॉल में 1500 बैठक‑क्षमता वाला मुख्य हॉल, 53 सुसज्जित कमरे, एक कॉन्फ्रेंस हॉल और तीन मीटिंग हॉल भी शामिल होंगे। इसके अलावा 2 मल्टीप्लेक्स थिएटर (प्रत्येक 250 बैठक), 27 फ़ूड ज़ोन शॉप्स, 3 रेस्टोरेंट, 2 गेम ज़ोन और 1200 वर्गफुट का “मिलेट लोक” बन रहा है, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों के मिनीबॉउल अनाज‑आधारित व्यंजन पेश किया जाना संभावित है। यह दृश्य “मल्टीप्लेक्स भक्ति” और “मॉल‑आधारित तीर्थ‑अर्थव्यवस्था” के नए रूप की ओर इशारा करता है, जहाँ श्रद्धालु दर्शन के साथ‑साथ थिएटर टिकट और फूड ज़ोन का भी टिकट लेकर आ सकें।

पार्किंग, एस्केलेटर और आगंतुकों के लिए 400 चार‑पहिया और 200 दो‑पहिया वाहनों की बेसमेंट पार्किंग, 12 एस्केलेटर और 13 लिफ्ट की व्यवस्था भी की जा रही है। यह जानकारी उस शहरी‑पर्यटक अर्थव्यवस्था को दिखाती है जहाँ अब तीर्थ‑यात्रा में निजी गाड़ी, एसी‑हॉल और फास्ट‑फूड अनिवार्य बनते जा रहे हैं।

उज्जैन विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, एकता मॉल का निर्माण‑कार्य लगभग 70 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है और शेष कार्य को जुलाई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सिंहस्थ महाकुम्भ से पहले इसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खोलने की योजना बन रही है, ताकि इसे “महाकाल के आस‑पास सांस्कृतिक‑आर्थिक केंद्र” के रूप में ब्रांड किया जा सके।

सिंहस्थ मेलाधिकारी और उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह के आधिकारिक बयानों में इस मॉल को “तीर्थ‑यात्रा के साथ व्यापार और रोज़गार को जोड़ने वाला नया डिज़ाइन” बताया जा रहा है।

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