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उत्तराखंड: विपक्ष ने की रोडवेज बसों के नये बेड़े की खरीद की एसआईटी जांच की मांग

By भाषा | Updated: December 7, 2019 06:12 IST

इंदिरा ने कहा कि टाटा मोटर्स जैसी प्रतिष्ठित कंपनी द्वारा निर्मित इन बसों के गीयर बॉक्स और क्लचों ने काम ही नहीं किया और उनकी लगेज कैबिनेट भी सामान रखते ही नीचे आ गिरीं।

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ठळक मुद्देउन्होंने कहा कि रोडवेज के अधिकारियों तथा चालकों ने इन बसों को सुरक्षा कारणों से चलाने से इंकार कर दिया है । कांग्रेस नेता ने कहा कि खरीदी गयी बसों का पूरा बेड़ा डिपो में ऐसे ही बेकार खडा है

उत्तराखंड विधानसभा में शुक्रवार को विपक्षी कांग्रेस ने परिवहन विभाग द्वारा की गयी 150 बसों के बेड़े की खरीद में कथित अनियमितताओं की विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर जांच की मांग की । भोजनावकाश के बाद सदन में यह मुद्दा उठाते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि खरीदी गयी 150 बसों में से शुरुआत में राज्य की सड़कों पर उतारी गयी तीन बसें तकनीकी रूप से खराब हैं और चलाने योग्य नहीं हैं ।

इंदिरा ने कहा कि टाटा मोटर्स जैसी प्रतिष्ठित कंपनी द्वारा निर्मित इन बसों के गीयर बॉक्स और क्लचों ने काम ही नहीं किया और उनकी लगेज कैबिनेट भी सामान रखते ही नीचे आ गिरीं। उन्होंने कहा कि रोडवेज के अधिकारियों तथा चालकों ने इन बसों को सुरक्षा कारणों से चलाने से इंकार कर दिया है । कांग्रेस नेता ने कहा कि खरीदी गयी बसों का पूरा बेड़ा डिपो में ऐसे ही बेकार खडा है और पुरानी खटारा बसें राज्य की सड़कों पर अब भी दौड़ रही हैं।

बसों की खरीद में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इंदिरा ने इन अनियमितताओं की एसआईटी से जांच कराने की मांग की । उन्होंने कहा कि बसों का पहले परीक्षण करना खरीद प्रक्रिया का हिस्सा है और ऐसा न किया जाना भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है । चकराता विधायक और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी इस मसले की एसआईटी से जांच कराये जाने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि बसों को पहाडी क्षेत्रों की जीवनरेखा माना जाता है और खराब बसों में यात्रा करने से जनहानि भी हो सकती है।

इस मसले का जबाब देते हुए परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने आरोपों को आधारहीन बताया। उन्होंने दावा किया कि बसों के बेड़े की खरीद में पूरी प्रक्रिया का पालन हुआ और नियमों का कहीं कोई उल्लंघन नहीं हुआ । उन्होंने हालांकि माना कि बसों में गंभीर तकनीकी खामी पायी गयी है। उन्होंने कहा कि हमने तत्काल ही बसों को सड़कों से हटा लिया जिससे लोगों की जान को कोई खतरा न हो। मंत्री ने कहा कि यहां 14 दिसंबर को विशेषज्ञों की एक टीम आ रही है जो यह देखेगी कि बेड़े की बसें चलने योग्य हैं या नहीं । उन्होंने बताया कि इस गड़बड़ी को लेकर एक विभागीय जांच चल रही है । भाषा दीप्ति प्रशांत प्रशांत

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