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ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर किया तंज, बोले- ''हमने तो साथ मिलकर ताकत दिखाई लेकिन उनके ही इलाकों में हम पिट गए"

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: May 24, 2022 21:55 IST

राजनीतिक महात्वाकांक्षा के कारण पिछली योगी सरकार से मंत्री पद त्यागकर अखिलेश यादव के साथ राजभर और यादव की सोशल इंजीनियरिंग करने निकले ओम प्रकाश राजभर अब यादव-राजभर फार्मूले को ही फेल बता रहे हैं।

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ठळक मुद्देसुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के सुर सपा प्रमुख अखिलेश यादल के लिए बदलने लगे हैंयूपी चुनाव में मिली हार के बाद अब ओपी राजभर सूबे में यादव-राजभर फार्मूले को फेल बता रहे हैंराजभर ने कहा कि चुनाव में हमने सपा के साथ अपनी ताकत लगाई लेकिन सपा के गढ़ में ही हम पिट गए

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के हाथों करारी शिकस्त खाने के बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के सुर बदलने लगे हैं।

राजनीतिक महात्वाकांक्षा के कारण पिछली योगी सरकार से मंत्री पद त्यागकर अखिलेश यादव के साथ राजभर और यादव की सोशल इंजीनियरिंग करने निकले ओम प्रकाश राजभर अब यादव-राजभर फार्मूले को फेल बता रहे हैं।

इतना ही नहीं विधानसभा चुनाव में हार का ठिकरा भी अखिलेश यादव और उनकी समाजवादी पार्टी पर फोड़ने से नहीं चूंक रहे हैं। दरअसल माना ये जा रहा है कि चुनावी हार के बाद सपा के कुनबे में जिस तरह से शिवपाल और आजम खान मन खट्टा किये बैठे हैं। ठीक उसी तरह से ओम प्रकाश राजभर भी सपा के साथ सियासी दांव खेलने पर अब पछता रहे हैं।

यही कारण है कि ओपी राजभर अब अखिलेश यादव का नाम सुनते ही तिलमिला जा रहा हैं और सपा गठबंधन के उनकी बढ़ती तल्खी का आलम यह है कि गुजरे तीन दिनों ओपी राजभर ऐसे तीन बयान दे चुके हैं। जिससे कयास लग रहे हैं कि राजभर फिर से पाला बदल सकते हैं।

सियासी हलकों में भीतरखाने इस बात की भी चर्चा हो रही है कि ओपी राजभर शायद आजम खान और शिवपाल यादव के बनने वाले संभावित मोर्चे का हिस्सा बन सकते हैं। यह इस बात से समझा जा सकता है कि मंगलवार को भी ओम प्रकाश राजभर ने चुनावी हार के लिये सीधे तौर पर अखिलेश यादव और उनकी पार्टी सपा को जिम्मेदार ठहरा दिया।

2022 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा के झंडे तले छह विधायकों को विधानसभा पहुंचाने के बाद ओपी राजभर ने कहा है कि सुभासपा ने चुनाव में जमकर प्रदर्शन किया लेकिन सपा गढ़ में वो उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पायी, जितनी की उन्हें उम्मीद थी।

ओपी राजभर ने विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "सपा के गढ़ में हम हारे, ये बात मैं नहीं बल्कि सपा के लोग ही कह रहे हैं। वो तो यह भी कह रहे हैं कि आप ही अखिलेश को यह बात बता दीजिए क्योंकि वो लोग इस बात को कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।"

इसके साथ ही ओपी राजभर ने यह भी कहा, "यह सच है कि हम सपा के गढ़ में हारे हैं, हम तो उनका (अखिलेश यादव) साथ देने के लिए चुनाव के 4 महीने पहले सरकार को लात मारकर उनके साथ आ गये थे। हमने उनके साथ मिलकर अपनी ताकत भी दिखाई। लेकिन उनके ही इलाकों में हम पिट गए तो हम क्या कर सकते हैं?''

चुनाव हारने के बाद अखिलेश यादव और सपा के खिलाफ ओमप्रकाश राजभर ने पहली बार इतनी बेबाकी से बोलने का साहस दिखाया है। वैसे तो ओपी राजभर कहते रहते हैं कि सुभासपा और सपा का गठबंधन बना रहेगा लेकिन भीतरखाने यह भी माना जा रहा है कि वो अखिलेश यादव के प्रबल विरोधी उनके चाचा शिवपाल यादव और सपा से नाराज चल रहे आजम खान से भी बराबर संपर्क में हैं और हो सकता है कि सियासी कलाबाजी दिखाते हुए वो अखिलेश विरोधी गुट का हिस्सा बन जाएं।

वहीं इससे पूर्व यूपी की सियासत में इस बात की भी अटकलें लग रही थीं कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ओपी राजभर सपा को नमस्कार करके फिर से भाजपा के सामने हाथ जोड़ते हुए नजर आ सकते हैं क्योंकि बीते दिनों लखनऊ गेस्ट हाउस में बीजेपी के दो मंत्रियों ने राजभर के साथ लंबी मुलाकात की थी।

बताया जा रहा है कि ओपी राजभर उस बैठक में अपने दोनों बेटों के साथ मौजूद थे, जो लखनऊ गेस्टहाउस में करीब दो घंटे तक चली। हालांकि बैठक के बाद मझे हुए नेता के अंदाज में ओपी राजभर ने भाजपा के साथ जाने की अटकलों को खारिज कर दिया था। उस बैठक में योगी सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी बैठक के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था। 

टॅग्स :ओम प्रकाश राजभरअखिलेश यादवसमाजवादी पार्टीSuheldev Bharatiya Samaj Partyआज़म खानशिवपाल यादव
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