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तवांग को भारत का हिस्सा बनाने वाले नायक मेजर खाथिंग को सम्मानित किया गया

By भाषा | Updated: February 14, 2021 18:01 IST

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तवांग, 14 फरवरी अरुणाचल के तवांग को भारतीय संघ के अधीन लाने वाले मेजर रालेंगनाओ बॉब खाथिंग को पहली बार रविवार को प्रमुख रक्षा अध्यक्ष बिपिन रावत, दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्री एवं राज्यपाल की उपस्थिति में सम्मानित किया गया।

पहले नार्थ ईस्ट फ्रंटियर (नेफा) और अब अरुणाचल प्रदेश के सहायक राजनीतिक अधिकारी खाथिंग ने वर्ष 1950 के दशक के शुरुआत में असम के तत्कालीन राज्यपाल जयरामदास दौलतरात के सीधे मार्गदर्शन में तवांग को भारतीय संघ के अधीन लाने के लिए साहसिक अभियान चलाया।

तवांग स्थित कलवांगपो सभागार में मेजर रालेंगनाओ बॉब खाथिंग स्मारक की आधारधशीला रखने के कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा, केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू, अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ब्रिगेडियर (अवकाश प्राप्त) बीडी मिश्रा और जनरल रावत शामिल हुए।

रिजिजू ने कहा, ‘‘खाथिंग के सम्मान में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। तवांग के नायक के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। खाथिंग को उचित सम्मान दिया गया जिन्हें नजरअंदाज किया गया था।’’

इस कार्यक्रम में मेजर खाथिंग के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे।

मेजर खाथिंग मणिपुर के नगा थे जिन्हें 17 जनवरी 1951 में दौलतराम ने असम के तेजपुर के पास चारीदुआर से असम राइफल्स के 200 जवानों एवं 600 पोर्टर के साथ तवांग कूच करने आदेश दिया था।

द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले तवांग स्वतंत्र तिब्बत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में था और कई कोशिशों के बावजूद ब्रिटिश उस पर अधिकार नहीं कर सके।

नेफा के इतिहास के मुताबिक खाथिंग जब अपने साथियों के साथ तवांग पहुंचे तो उन्होंने तवांग मठ के पास पठार पर स्थानीय कर अधिकारियों, गावं के बजुर्गों एवं तवांग के अहम लोगों से मुलाकात की।

खाथिंग ने अपने कूटनीतिक कौशल से स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया।

जल्द ही उन्हें पता लगा कि मोनपा समुदाय तिब्बती प्रशासन के सख्त कर से त्रस्त है। उन्होंने स्थानीय लोगों को भारत एवं यहां की लोकतांत्रिक व्यवस्था की जानकारी दी एवं भरोसा दिया कि भारत उन पर कभी अतार्किक कर नहीं लगएगा।

शीघ्र ही असम राइफल्स के जवानों एवं खाथिंग ने तवांग पर नियंत्रण स्थापित कर लिया एवं तवांग एवं बुमला पर तिरंगा फहरा दिया एवं इस तरह से यह भारत का हिस्सा बन गया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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