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कोविड-19 रोधी टीका लगवाने वाले लोगों पर उसके प्रभाव का पता लगाने के लिए होगी राष्ट्रीय निगरानी मंच की स्थापना

By भाषा | Updated: May 14, 2021 16:38 IST

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नयी दिल्ली, 14 मई कोविड-19 रोधी टीका लगवाने वाले लोगों पर उसके प्रभाव का पता लगाने और पहला तथा दूसरा टीका लगने के बाद लोगों में सभावित संक्रमण निर्धारित करने के लिए जल्द एक राष्ट्रीय निगरानी मंच की स्थापना की जाएगी।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ऐसा मंच स्थापित करने के लिए ‘नेशनल टेक्नीकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्युनाइजेशन’ (टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह) की सिफारिशों को टीकाकरण के राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वीकार कर लिया है।

‘आईएनसीएलईएन ट्रस्ट’ के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा, ‘‘ कोविड-19 कार्य-दल, जो ‘नेशनल टेक्नीकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्युनाइजेशन’ (एनटीएजीआई) का हिस्सा है, उसने कोविड-19 रोधी टीका लगवाने वाले लोगों पर उसके प्रभाव का पता लगाने और पहला तथा दूसरा टीका लगने के बाद लोगों में सभावित संक्रमण निर्धारित करने के लिए जल्द एक राष्ट्रीय निगरानी मंच की स्थापना की जाने की सिफारिश की है।’’

‘आईएनसीएलईएन ट्रस्ट’, कोविड-19 के कार्य-दल का नेतृत्व कर रहा है।

उन्होंने कहा कि ‘कोविशील्ड’ टीके की दो खुराक के बीच के समय को बढ़ाने के बाद उसके प्रभाव पर नजर रखना जरूरी हो गया है।

गौरतलब है कि सरकार ने बृहस्पतिवार को कोविड-19 कार्य-दल के ‘कोविशील्ड’ के टीके की दो खुराक लेने के बीच के अंतर को 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12 से 16 सप्ताह करने की सिफारिश भी स्वीकार कर ली थी।

एनटीएजीआई ने सिफारिश की है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और अन्य एजेंसियों के वास्तविक समय में वर्तमान आंकड़ों का इस्तेमाल इस सुविधा की स्थापना करने के लिए किया जा सकता है, ताकि जमीनी हकीकत की समीक्षा की जा सके।

सरकारी पैनल ने यह भी सुझाव दिया है कि अब गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी टीका लगवाने का विकल्प दिया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, एनटीएजीआई ने यह भी सुझाव दिया है कि जिन लोगों प्रयोगशाला परीक्षण में सार्स-सीओवी-2 की पुष्टि हुई है, उन्हें संक्रमण मुक्त होने के छह महीने बाद तक कोविड-19 रोधी टीका लगवाने से रोका जाए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोविड-19 से उबरने के चार से आठ सप्ताह बाद लोग टीका लगवा सकते हैं और गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अभी टीके नहीं लगाए जा रहे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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