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2027 तक कानून नहीं बन सकता है 'नारी शक्ति वंदन विधेयक', परिसीमन और जनगणना के बाद ही मिलेगा फायदा, जानिए विस्तार से

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: September 19, 2023 18:30 IST

बिल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू नहीं किया जा सकता है। मौजूदा कानून के अनुसार, अगला परिसीमन साल 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के बाद ही किया जा सकता है। इसका प्रभावी अर्थ यह है कि विधेयक कम से कम 2027 तक कानून नहीं बन सकता है।

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ठळक मुद्दे'नारी शक्ति वंदन विधेयक' संसद में पेश किया जा चुका हैबिल परिसीमन प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही लागू हो सकता हैविधेयक कम से कम 2027 तक कानून नहीं बन सकता है

नई दिल्ली: महिलाओं को आरक्षण देने वाले 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' संसद में पेश किया जा चुका है। इसके प्रावधानों के मुताबिक बिल के कानून बनने पर लोकसभा में 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। इन 181 सीटों में से 33 फ़ीसदी एससी-एसटी के लिए आरक्षित होंगी। यानी 181 में से एसटी-एससी कैटेगरी की 60 महिला सांसद होंगी। ये बिल सीधे जनता द्वारा चुने जाने वाले प्रतिनिधियों पर ही लागू होगा। लेकिन इसके बावजूद भी कई ऐसी बातें हैं जिनपर विपक्ष सवाल उठा रहा है।

महिला आरक्षण विधेयक भारत में परिसीमन प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही लागू हो सकता है। इसका मतलब यह है कि यह बिल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू नहीं किया जा सकता है। मौजूदा कानून के अनुसार, अगला परिसीमन साल 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के बाद ही किया जा सकता है। इसका प्रभावी अर्थ यह है कि विधेयक कम से कम 2027 तक कानून नहीं बन सकता है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि महिला कोटा 2029 के लोकसभा चुनाव तक लागू हो सकता है।

संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि संसद के दोनों सदनों से विधेयक पारित होने के बाद इसे कानून बनने के लिए कम से कम 50 प्रतिशत राज्य विधानसभाओं से भी मंजूरी लेनी होगी। राज्य विधानसभाओं की मंजूरी आवश्यक है क्योंकि इससे राज्यों के अधिकार प्रभावित होते हैं। एक बार जब यह विधेयक अधिनियम बन जाएगा, तो सदन/विधानसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कुल सीटों में से 33% इन समुदायों की महिलाओं के लिए अलग रखी जाएंगी। एक बार अधिनियम बनने के बाद यह कानून 15 वर्षों तक लागू रहेगा। इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है। 

 इस बिल का सबसे अधिक फायदा यूपी में महिलाओं को मिलेगा। वर्तमान में उत्तर प्रदेश की विधानसभा के 403 सदस्यों में से 48 महिलाएं हैं। लोकसभा में भी यूपी की 80 लोकसभा सीटों में सिर्फ 11 महिला सांसद हैं। हालांकि बिल के कानून बन जाने के बाद यूपी में लोकसभा की 26, विधानसभा की 132 सीटें महिलाओं को मिलेंगी।

लेकिन इसके परीसीमन के बाद लागू होने के प्रावधान पर अंगुली उठने लगी है। महिला आरक्षण बिल पर सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, "इसमें क्या एतिहासिक है? यह कहते हैं कि आपको महिला आरक्षण 2029 में मिलेगा... इसमें परिसीमन होना जरूरी है। अगर यह (परिसीमन) नहीं होगा तो क्या होगा? यह महिलाओं को एक सपना दिखा रहे हैं कि आपको 2029 में आरक्षण मिलेगा... इनको आज महिला आरक्षण की याद क्यों आ रही हैं? इनकी सोच राजनीतिक है। यह राजनीति के अलावा सोच ही नहीं सकते हैं।"

सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा, "संसद में पहले भी बिल पेश किया गया था, राज्यसभा में पास भी हो गया था, अब उसे वापस लिया जाएगा। ये अब लाया गया है, ये 2029 से पहले लागू नहीं होगा। हम तो इसका समर्थन कर रहे हैं...मैं जानता हूं सदन में जो बहुमत प्राप्त लोग हैं वे एंटी-OBC हैं। वे OBC महिलाओं को आरक्षण नहीं देंगे।"

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