लाइव न्यूज़ :

सार्वजनिक क्षेत्र की 28 इकाइयों को बेचने की तैयारी में नरेंद्र मोदी सरकार, खरीददार न मिलने पर बढ़ाई जा रही तारीखें

By शीलेष शर्मा | Updated: March 15, 2020 06:12 IST

हाल ही में एयर इंडिया में बोली लगाने वालों के लिए सरकार ने निर्धारित तिथि को आगे बढ़ाकर दरवाजे खोले है. पहले बोली लगाने के लिए 17 मार्च की तिथि निर्धारित की थी लेकिन अब उसे बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है.

Open in App
ठळक मुद्देनरेंद्र मोदी सरकार बारी-बारी से सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों को ठिकाने लगाने में जुटी हुई है.सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद अनेक ऐसी इकाइयां है जिनके लिए सरकार को कोई ग्राहक नहीं मिल रहा है, नतीजा सरकार तारीख पर तारीख बढ़ा रही है.

नरेंद्र मोदी सरकार बारी-बारी से सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों को ठिकाने लगाने में जुटी हुई है. सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद अनेक ऐसी इकाइयां है जिनके लिए सरकार को कोई ग्राहक नहीं मिल रहा है, नतीजा सरकार तारीख पर तारीख बढ़ा रही है. 

हाल ही में एयर इंडिया में बोली लगाने वालों के लिए सरकार ने निर्धारित तिथि को आगे बढ़ाकर दरवाजे खोले है. पहले बोली लगाने के लिए 17 मार्च की तिथि निर्धारित की थी लेकिन अब उसे बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है.

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सरकार ने देश की 28 ऐसी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को चुना है जिनको उन्हें बेचने का इरादा है.

सार्वजनिक क्षेत्र की कुछ इकाईयां भले ही घाटे में हो बावजूद इसके उन्हें फिर से शुरु करने की जगह सरकार ने ठिकाने लगाने का रास्ता चुना. इसमें कुछ ऐसी कंपनियां भी शामिल की गयी जो लगातार मुनाफा कमा रही है.

सरकार ने अब तक 28 कंपनियों को बेचने के लिए चुना है इनमें स्कूटर इंडिया लिमिटेड, ब्रिज एन्ड रुफ इंडिया लिमिटेड, हिन्दुस्थान न्यूजप्रिंट, भारत पंप एन्ड कम्प्रेसर लिमिटेड, सीमेंट कारपोरेशन आफ इंडिया, सेंट्रल इलैक्ट्रोनिक लिमिटेड, बीईएमएल, फेरो स्क्रप निगम, पवन हंस लिमिटेड,एयर इंडिया एवं उसकी पांच सहायक कंपनिया, एचएलएल लाइफ केयर, हिन्दुस्तान एन्टीबायोटिक लिमिटेड, शिपिंग कारपोरेशन, बंगाल कैमिकल्स, भारत पेट्रोलियम, ईपीआईएल, एचपीएल, कंटेनर कारपोरेशन लिमिटेड, आईटीडीसी, आईएमपीसीएल सहित दूसरी कंपनियां शामिल है.

जहां एक ओर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को सरकारी स्वामित्व से मुक्त किया जा रहा है तो वहीं मुनाफा वाली संस्थाओं से दबाव डालकर निजी क्षेत्र की कंपनियों की आर्थिक सहेत सुधारने की कोशिश हो रही है. जिसका ताजा उदाहरण यस बैंक है जहां केवल एसबीआई ही नही, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई जैसी बंैकों के यस बैंक से निवेश कराया जा रहाहै ताकि उसकी माली हालात सुधर सके.  परंतु जिन लोगों ने यस बैंक से भारी कर्ज लेकर नहीं चुकाया है उनसे वसूली के लिए सरकार ने अपनी किसी योजना का खुलासा नहीं किया है.

टॅग्स :मोदी सरकारभारत सरकारलोकमत हिंदी समाचार
Open in App

संबंधित खबरें

भारतTamil Nadu Election 2026: क्या CBSE का नया सिलेबस भाषा विवाद की जड़? सीएम स्टालिन ने कहा- "भाषा थोपने का सुनियोजित प्रयास"

भारतImport Duty Cut: सरकार ने आज से 41 वस्तुओं पर हटाया आयात शुल्क, चेक करें पूरी लिस्ट

भारतऊर्जा संकट में भी आत्मविश्वास कायम रहने का क्या है राज ?

भारतBihar News: राज्य अधिकारियों ने दिया अपनी संपत्ति का ब्योरा, जानें सबसे ज्यादा अमीर कौन?

कारोबारNew Labour Code: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर, 1 अप्रैल से लागू हुए नए नियम, ओवरटाइम और PF में हुए ये बदलाव

भारत अधिक खबरें

भारत'Three Allegations, Zero Truth': आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा की भूमिका से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का जवाब

भारतMadhya Pradesh: अनूपपुर ज़िले में चार-मंज़िला होटल गिरने से मलबे में कई लोगों के फँसे होने की आशंका, एक की मौत

भारततमिलनाडु चुनावों के लिए BJP का टिकट न मिलने के बाद अन्नामलाई ने दिया अपना स्पष्टीकरण

भारतलखनऊ सहित यूपी के 17 शहरों में कूड़े का अंबार?, मतदान करने असम गए हजारों सफाईकर्मी, 12 अप्रैल को लौंटेगे?

भारतबारामती विधानसभा सीटः सुनेत्रा पवार के खिलाफ प्रत्याशी ना उतारें?, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा- निर्विरोध जिताएं, सभी दलों से की अपील