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मोहन भागवत ने कहा- लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी, सभी भारतीयों का डीएनए एक

By विनीत कुमार | Updated: July 5, 2021 14:35 IST

मोहन भागवत ने रविवार को मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से गाजियाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में ये बात कही। उन्होंने साथ ही कहा कि लोकतंत्र में हिंदू या मुस्लिम का प्रभुत्व नहीं हो सकता है।

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ठळक मुद्देअगर कोई हिंदू कहता है कि यहां कोई मुस्लिम नहीं रहना चाहिए तो वह हिंदू नहीं है: मोहन भागवतमोहन भागवत ने कहा- हिंदू-मुस्लिम एकता जैसी बात ही भ्रामक है क्योंकि वे अलग हैं ही नहीं बल्कि एक हैंमोहन भागवत ने ख्वाजा इफ्तकार अहमद की किताब ‘द मीटिंग ऑफ माइंड्स’ का विमाचेन भी किया

नई दिल्ली: आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि सभी भारतीयों का डीएनए एक है और जो लोग लिंचिंग जैसा काम करते हैं वे हिंदुत्व के खिलाफ हैं। मोहन भागवत ने ये बात गाजियाबाद में आरएसएस की अल्पसंख्यक विंग मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कही।

मोहन भागवत ने इस कार्यक्रम में कहा, 'अगर कोई हिंदू कहता है कि यहां कोई मुस्लिम नहीं रहना चाहिए तो वह शख्स हिंदू नहीं है। गाय के पवित्र जानवर है लेकिन जो लोग लिंचिंग जैसा काम कर रहे हैं, वे हिंदुत्व के खिलाफ हैं। ऐसे मामलों में बिना किसी पक्षपात के कानून को अपना काम करना चाहिए।'  

साथ ही मोहन भगवत ने ये भी कहा कि कुछ ऐसे मामलें जरूर हैं जिसमें लोगों के खिलाफ लिंचिंग के गलत मामले दर्ज कराए गए। मोहन भागवन ने कहा कि देश में एकता के बिना विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि एकता का आधार राष्ट्रीयता और पूर्वजों पर गर्व होना चाहिए।

सभी भारतीयों का डीएनए एक है: मोहन भागवत

मोहन भागवन ने इस कार्यक्रम में साथ ही कहा कि हिंदू-मुस्लिम के बीच झगड़ों को संवाद से ही सुलझाया जा सकता है। भागवत ने कहा, 'हिंदू-मुस्लिम एकता जैसी बात ही भ्रामक है क्योंकि वे अलग हैं ही नहीं बल्कि एक हैं। सभी भारतीयों का डीएनए एक है, भले ही वे किसी भी धर्म से हैं।'

मोहन भागवत ने कहा, 'हम लोकतंत्र में हैं। यहां हिंदू या मुस्लिम का प्रभुत्व नहीं हो सकता है। यहां केवल भारतीयों का प्रभुत्व रह सकता है।' उन्होंने कहा कि हिंदू और मुस्लिम कुछ मुद्दों पर अलग-अलग विचार रख सकते हैं लेकिन इसके ये मायने नहीं हैं कि वे अलग-अलग समाज से हैं।

भागवत ने साथ ही कहा कि राजनीति लोगों एक साथ नहीं ला सकती, ये केवल बंटवारा कर सकती है। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को ऐसे भ्रामक डर से बचना कि भारत में इस्लाम खतरे में हैं।

भागवत ने इस अवसर पर ख्वाजा इफ्तकार अहमद की किताब ‘द मीटिंग ऑफ माइंड्स’ का विमाचेन भी किया। भागवत ने कहा कि वह न तो कोई छवि बनाने के लिए कार्यक्रम में शामिल हुए हैं और न ही वोट बैंक की राजनीति के लिए। उन्होंने कहा कि संघ न तो राजनीति में है और न ही यह कोई छवि बनाए रखने की चिंता करता है।

(भाषा इनपुट)

टॅग्स :मोहन भागवतआरएसएसगाजियाबाद
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