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मांडविया ने कोविड-19 से उबरने के बाद स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से निपटने के लिए दिशानिर्देश जारी किए

By भाषा | Updated: September 23, 2021 20:55 IST

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नयी दिल्ली, 23 सितंबर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कोविड-19 से उबरने के बाद होनी वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर बृहस्पतिवार को दिशानिर्देश जारी किए, जो मरीजों में कोरोना वायरस संक्रमण के दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए देश के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए मददगार होंगे।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान के मुताबिक मंत्री ने कहा कि ये ‘पोस्ट कोविड सिक्वील मॉडयूल्स’ देश भर में चिकित्सकों, नर्सों, पैरामेडिकल कर्मियों और सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों के लिए मददगार होंगे।

मेडिकल के क्षेत्र में सिक्वील का तात्पर्य पूर्व में हुए रोग या लगी चोट के कारण पैदा हुई हालत से है।

मंत्रालय के बयान के मुताबिक मंत्री ने कहा कि यह जरूरी है कि कोविड बाद से जुड़ी स्थिति की धारणाओं, जैसे कि डर और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों से निपटा जाए।

मांडविया ने कहा, ‘‘हमारे समाज में कोविड-19 से उबरने के बाद होने वाली समस्याओं जैसे भय उत्पन्न होना और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतों से निपटना महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दीर्घकालीन प्रभावों की समस्या से निपटने के उद्देश्य से चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का मार्गदर्शन करने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के उपचार के लिए अग्रसक्रिय एवं समग्र उपचार की आवश्यकता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं हो।

बयान में मांडविया के हवाले से कहा गया, ‘‘हमने स्टेरॉयड की अधिक खुराक के कारण रोगियों में कोविड-19 से उबरने के बाद म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) जैसे दुष्प्रभाव के मामले देखे हैं। ऐसी दवाइयां लेना महत्वपूर्ण है, जिनके कम या बहुत कम दुष्प्रभाव हों। यदि हम पहले से सतर्क हों, तो कोविड के भावी परिणामों से निपटने में मदद मिलेगी।’’

उन्होंने कहा कि संक्रमण के बाद की समस्याओं से निपटने के मकसद से मॉड्यूल तैयार करने के लिए देश भर के योग्य व्यक्तियों द्वारा प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये बहुत ही विशिष्ट मॉड्यूल हैं जो स्वास्थ्य पेशेवरों के विभिन्न क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं।

बयान में कहा गया कि इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से निपटने और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बयान में पवार के हवाले से कहा गया, ‘‘इस महामारी ने हमारे स्वास्थ्य और स्वास्थ्य प्रणाली के लिए अप्रत्याशित चुनौती पेश की है। इतनी बड़ी आबादी वाले देश के लिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल एक बड़ी चुनौती है। हमें मानसिक स्वास्थ्य की इस चुनौती से निपटने के लिए अपनी क्षमता का निर्माण करने की जरूरत है।’’

उन्होंने कहा कि यदि अग्रिम मोर्चे के कर्मियों के पास उचित ज्ञान और प्रशिक्षण हो, तो वे कोविड-19 से उबरने के बाद सामने आने वाली इन चुनौतियों के खिलाफ लड़ाई में एक मूल्यवान संसाधन बन सकते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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