पटनाः राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए मकर संक्रांति के मौके पर चूड़ा-दही का भोज कराने की तैयारी कर रहे हैं। लालू यादव हर साल मकर संक्रांति पर इस भोज का आयोजन करते रहे हैं, जिसे सामाजिक समरसता और राजनीतिक मेलजोल का प्रतीक माना जाता है। लालू यादव के इस आयोजन में सभी वर्गों और दलों के लोगों की मौजूदगी उनकी राजनीति की एक खास पहचान रही है। अब इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा–दही भोज का आयोजन करने जा रहे हैं।
तेज प्रताप यादव विधानसभा चुनाव में जनशक्ति जनता दल (जजद) के रूप में नई पार्टी बनाकर उतरे थे। तेजप्रताप यादव खुद भी महुआ से चुनाव हार गए हैं। लेकिन जजद के अध्यक्ष की हैसियत से तेज प्रताप यादव मकर संक्रांति पर चूड़ा-दही का भोज आयोजित करने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि राबड़ी निवास में इस साल मकर संक्रांति का भोज आयोजित होने पर संशय है।
तेजप्रताप यादव भले ही परिवार से अलग कर दिए गए हैं, लेकिन उन्होंने इस बार मां-पिता की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने आवास पर चूड़ा-दही का भोज आयोजित करने जा रहे हैं। तेजप्रताप यादव ने अपने चूड़ा-दही भोज में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी आमंत्रित किया है।
इसके अलावा अलग-अलग दलों के दूसरे नेताओं और बिहार सरकार के मंत्रियों को भी आमंत्रण भेजा गया है। तेजप्रताप यादव ने कहा कि वह छोटे भाई नहीं नेता प्रतिपक्ष को चूड़ा दही भोज में आने का आमंत्रण भेजा है। मीडिया से बातचीत में तेजप्रताप यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री जी को भी कार्ड दिया जाएगा। गवर्नर साहब को दिया जाएगा। उपमुख्यमंत्री को कार्ड दिया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष जो हैं उनको भी दिया जाएगा। सभी लोगों को आमंत्रण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 14 जनवरी को उनके आवास पर गुड़, तिलकुट, चूड़ा के साथ बढ़िया दही का इंतजाम होगा। सभी लोगों को न्योता दिया जा रहा है। अपनी पार्टी की तरफ से तो सभी लोगों को बुलाया जा रहा है। तेज प्रताप ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन पूरी तरह सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति का पर्व पारंपरिक रूप से चूड़ा, दही, गुड़ और तिलकुट के साथ मनाया जाता है और उसी परंपरा को निभाते हुए यह भोज रखा गया है। उन्होंने बताया कि पार्टी की ओर से सभी लोगों को निमंत्रण कार्ड दिए जा रहे हैं और पूरे बिहार से जो भी लोग आना चाहते हैं, वे इसमें शामिल हो सकते हैं।
हालांकि इस आयोजन के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के बीच बढ़ती दूरी अब सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगी है। वहीं दूसरी ओर तेज प्रताप की भाजपा और एनडीए के अन्य घटक दलों के नेताओं से बढ़ती नजदीकियों की भी लगातार चर्चा हो रही है।
ऐसे में मकर संक्रांति का यह चूड़ा–दही भोज केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की सियासत में नए समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है। बता दें इ मकर संक्रांति के चूड़ा-दही भोज में अक्सर बिहार की राजनीति करवट लेती रही है। बात चाहे दो बार नीतीश कुमार के एनडीए छोड़कर राजद के साथ जाने की हो, या जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के पाला बदलने का इतिहास,
ये तमाम राजनीतिक घटनाएं मकर संक्रांति के बाद ही घटित होती रही हैं। इस बार पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में राजद-कांग्रेस की अगुवाई वाले महागठबंधन को करारी हार मिली है। जबकि, नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन ने 202 सीटों पर जीत दर्ज सबको चौंका दिया है।