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मध्य प्रदेशः मंत्रियों की 'पसंद' के फेर में उलझा रहा विभागों का बंटवारा, नहीं बनी बात तो राहुल गांधी पर छोड़ा फैसला

By राजेंद्र पाराशर | Updated: December 27, 2018 19:42 IST

राज्य में भले ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया यह कहें की कांग्रेस में या फिर उनके बीच गुटबाजी नहीं है, मगर मुख्यमंत्री के लिए नाम का चयन और फिर मंत्री मंडल गठन के दौरान जो परिस्थिति निर्मित हुई उससे साफ नजर आ रहा है कि कांग्रेस के क्षत्रपों के बीच गुटबाजी के चलते ही मामले उलझ रहे हैं. 

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मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मंत्रियों की विभागों की पसंद के चलते तीनों दिग्गज कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया उलझे रहे. मंत्रिमंडल गठन के बाद जब राजधानी में मामला नहीं सुलझा तो राहुल गांधी के दरबार में यह मामला पहुंचा.

राज्य में भले ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया यह कहें की कांग्रेस में या फिर उनके बीच गुटबाजी नहीं है, मगर मुख्यमंत्री के लिए नाम का चयन और फिर मंत्री मंडल गठन के दौरान जो परिस्थिति निर्मित हुई उससे साफ नजर आ रहा है कि कांग्रेस के क्षत्रपों के बीच गुटबाजी के चलते ही मामले उलझ रहे हैं. 

अब ताजा मामला मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर उलझा हुआ है. मंत्रियों की पसंद के चलते बुधवार को विभागों का बंटवारा नहीं हो पाया. इसके पीछे पांच मंत्रियों सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी, तुलसीराम सिलावट, इमरती देवी और डा. विजयलक्ष्मी साधौ की अपनी पसंद को बताया जा रहा है. 

ये पांचों में मंत्री अपनी पसंद के विभाग चाहते हैं और उस मांग पर अड़ भी गए. इसके चलते बुधवार को दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों ही देर रात ज्योतिरादित्य सिंधिया से दूरभाष पर संपर्क करते रहे, मगर मामला सुलझा तो नहीं, बल्कि ऐसा उलझा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर छोड़ना पड़ा.

किसे चाहिए कौन सा विभाग

कमलनाथ समर्थक सज्जन वर्मा नगरीय प्रशासन मंत्रालय चाहते हैं. जबकि वर्मा को कमलनाथ लोक निर्माण और तरुण भानोत को नगरीय प्रशासन विभाग देना चाहते हैं. जबकि वर्मा इस विभाग के लिए अड़ गए. वहीं जीतू पटवारी ने जनसंपर्क विभाग की मांग कर डाली है. पटवारी को मुख्यमंत्री पर्यटन, युवा कल्याण और खेल विभाग देना चाह रहे थे. इसी तरह तुलसीराम सिलावट ने उनका सम्मान बना रहे ऐसे विभाग की मांग की. उन्होंने इतना कह दिया कि उनका नाम उप मुख्यमंत्री के लिए तय था. सिलावट ने यहां तक कह दिया कि अगर उनका सम्मान नहीं रहा तो वे सिंधिया के साथ ही काम करना पसंद करेंगे. इसी तरह डा. विजय लक्ष्मी साधौ को महिला एवं बाल विकास विभाग दिया जा रहा था, मगर वे चिकित्सा शिक्षा विभाग की मांग पर अड़ गई. इसी तरह सिंधिया समर्थक इमरती देवी ने भी महिला एवं बाल विकास विभाग की मांग कर डाली. वे दूसरा विभाग नहीं चाहती है.

दिग्विजय पुत्र को दिलाना चाहते हैं वित्त

मंत्रियों के बीच बंटवारे को लेकर जब मामला उलझा तो पता चला कि दिग्विजय सिंह खुद यह चाहते हैं कि उनके पुत्र जयवर्धन सिंह को वित्त विभाग मिले. इसके पीछे उनका अपना तर्क है. सिंह का तर्क है कि डा. गोविंद सिंह वरिष्ठ सदस्य हैं उन्हें गृह विभाग दिया जाना चाहिए. वहीं इस मामले में कमलनाथ का अपना तर्क है. वे वित्त विभाग अपने पास रखना चाहते हैं, जबकि गृह विभाग अपने समर्थक बाला बच्चन को देना चाहते हैं.

तीन वरिष्ठ विधायक भी राहुल से करेंगे शिकायत

मंत्रिमंडल में स्थान न मिलने पर तीन वरिष्ठ विधायक के.पी. सिंह, ऐंदल सिंह कंसाना और बिसाहूलाल सिंह ने दिग्विजय से मुलाकात कर अपनी शिकायत की, मगर बात नहीं सुलझी तो अब ये विधायक राहुल गांधी तक अपना मामला पहुंचाना चाहते हैं. बिसाहूलाल सिंह तो सिंह से मुलाकत के दौरान मंत्री न बनाए जाने पर रो पड़े. जबकि कंसाना ने मंत्री न बनाए जाने के लिए सीधे तौर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को जिम्मेदार बनाया. उन्होंने कहा कि उनके सहित तीनों विधायकों को मंत्री न बनने देने के पीछे केवल सिंधिया का अपना हठ था.

अजय सिंह, पचौरी भी हैं रुठे हुए

मंत्रिमंडल गठन के साथ ही उठे विवाद और नाराजगी का साजा कांग्रेस से हट नहीं रहा है. पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी भी खासे नाराज है. दोनों ही चुनाव तो हार चुके हैं, मगर किसी तरह से मंत्री बनना चाहते थे. यही वजह रही कि जब उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया तो वे मंत्रिमंडल के शपथ समारोह में नहीं पहुंचे. अजय सिंह ने अपने राजधानी स्थित बंगले का ताला लगाकर चले गए. उन्होंने किसी नेता से किसी तरह की कोई बातचीत नहीं की है. इसी तरह पचौरी की सक्रियता भी नजर नहीं आ रही है. वे भी मौन साधे हुए हैं.

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