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बिहारः इन चार नक्सल प्रभावित सीटों पर टिकी हैं सभी की निगाहें, RJD-महागठबंधन मे सीधा मुकाबला

By एस पी सिन्हा | Updated: March 29, 2019 05:58 IST

बीते पांच साल में कम से कम तीन बार गठबंधन बदल चुके हैं. अब लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दल महागठबंधन में शामिल हैं. इससे राज्य की चुनावी समीरकण काफी बदल गया है.

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बिहार के 40 संसदीय सीटों में से 4 लोकसभा सीटों पर प्रथम चरण में 11 अप्रैल को मतदान होने हैं. ऐसे में राज्य पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं जहां सियासी स्थिति, खास कर गठबंधनों की स्थिति साल 2014 के आम चुनाव के मुकाबले जबर्दस्त ढंग से बदल चुकी है. इन चारों सीटें नक्सल प्रभावित, जमुई, गया और नवादा में जहां सर्वाधिक मत दलितों के, वहीं औरंगाबाद राजपूत बहुल सीट है. यहां महागठबंधन और राजग के बीच सीधा मुकाबला है.

यहां उल्लेखनीय है कि गया लोकसभा सीट पर 2009 में भाजपा  जीती थी और उसे बरकरार रखते हुए भाजपा ने 2014 अपनी जीत कायम रखी. जमुई सीट से 2009 में एनडीए (जदयू) के कब्जे में रही थी, तो 2014 में जदयू से नाता टूटने पर एनडीए (लोजपा) के खाते में चली गई. उसी तरह नवादा सीट पर 2009 और  2014 में भाजपा का कब्जा बरकरार रहा. 

वहीं, औरंगाबाद सीट पर 2009 में एनडीए (जदयू) से जीतने वाले सुशील सिंह ने पाला बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया था और 2014 में भी उन्होंने अपनी जीत बरकरार रखने में सफलता पाई थी. इसतरह से इसबार विपक्षी दलों का एक सतरंगा महागठबंधन भाजपा की अगुआई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के खिलाफ चुनाव मैदान में है. 

यहां बीते पांच साल में कम से कम तीन बार गठबंधन बदल चुके हैं. अब लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दल महागठबंधन में शामिल हैं. इससे राज्य की चुनावी समीरकण काफी बदल गया है. साल 2014 में आम चुनाव के बाद से कई बार गठबंधन बदलने को ध्यान में रखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य में गठबंधन के नए सहयोगियों के बीच वोटों का स्थानांतरण होता है या नहीं? इस लिहाज से बिहार वास्तव में परीक्षण का एक मामला बन चुका है.

वहीं, एनडीए और महागठबंधन दोनों ही जाति के गणित को लेकर सावधान रहे हैं. भाजपा के उम्मीदवारों की सूची उच्च जातियों और अन्य पिछडे वर्गों पर केंद्रित है. जदयू अत्यंत पिछडे वर्गों और कुर्मी-कोइरी समूह से समर्थन हासिल करता है. जबकि लोजपा के पास अनुसूचित जातियों के बीच पासवान का आधार है. 

महागठबंधन को यादवों और मुसलमानों का समर्थन हासिल है. कांग्रेस और रालोसपा सवर्णों और कुर्मी-कोइरी के मतों में सेंध लगा सकती हैं, जो एनडीए का आधार है. जबकि जीतन राम मांझी वाली पार्टी हम को दलित मतों और राजद के परंपरागत मतों का सहारा है. 

इसमें औरंगाबाद और गया सीट जहा हम के खाते में गई है, वहीं जमुई सीट पर रालोसपा के उम्मीदवार मैदान में है. जबकि नवादा सीट पर राजद ने अपना उम्मीदवार उतारा है. 

वहीं, राजग के उम्मीदवार के तौर पर औरंगाबाद सीट पर जहां भाजपा के उम्मीदवार चुनाव मैदान में है, तो गया जदयू के खाते में चली गई है. जबकि नवादा और जमुई मे लोजपा के उम्मीदवार चुनावी दंगल में हैं.

टॅग्स :लोकसभा चुनावआरजेडीमहागठबंधनबिहार
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