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बिहार के इस बड़े अस्पताल के डॉक्टर गए हड़ताल पर, कुछ दिन पहले लापरवाही से हुई थी बच्चे की मौत

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: September 24, 2018 17:46 IST

मालूम हो कि पिछले माह नौ अगस्त, 2018 को राजधानी पटना स्थित एनएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों की भी मरीज के परिजनों द्वारा पिटाई की गई थी।

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पटना,24 सितंबर:बिहार के सबसे बड़े अस्पताल पटना स्थित पीएमसीएच के जूनियर डॉक्‍टर हड़ताल पर चले गए हैं। शिशु वार्ड में मरीज के परिजनों द्वारा की गई डॉक्‍टर की पिटाई के विरोध में जूनियर डॉक्‍टरों ने काम करना बंद कर दिया है। वार्ड में डॉक्‍टर मौजूद नहीं हैं। 

इस घटना का खामियाजा एक मासूम को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। डॉक्टरों की मानें तो हर बार अस्पताल प्रशासन के आश्वासन के बावजूद भी डॉक्टरों के साथ मारपीट हो रही है। बताया जाता है कि एक मरीज के परिजन द्वारा डॉ। दीनानाथ के साथ मारपीट की थी। इसमें डॉक्टर को गंभीर रूप से चोट लगी है। वहीं, अस्पताल अधीक्षक सभी सिनीयर डॉक्टर की बैठक कर इमरजेंसी में चिकित्सा सेवाएं बरकरार रखने के लिए लगे हैं। जूनियर डाक्टरों के हड़ताल से सभी विभागों में कामकाज ठप पड गया है।

पीएमसीएच में सुरक्षा पर सवाल उठ रहे है। हालांकि पीएमसीएच अधीक्षक ने भी स्वीकार किया है कि सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने हुए थे, जिससे डाक्टर दीनानाथ के साथ मार पीट हुई है। डॉ का आईसीयू में इलाज चल रहा है। अधीक्षक ने लोगों से अपील की है कि पीएमसीएच में इलाज के लिए आते मरीज धैर्य के साथ रहें। प्राप्त जानकारी के अनुसार आज सुबह मरीज की मौत से गुस्साएं परिजनों ने जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट की थी। मारपीट किये जाने से नाराज जूनियर डॉक्टरों ने कामकाज ठप कर हड़ताल पर चले गये हैं। इससे अन्य मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

बताया जाता है कि रविवार को पीएमसीएच के शिशु वार्ड में एक बच्चे को भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान आज सुबह करीब तीन बजे बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत से गुस्साये परिजनों ने अस्पताल में मौजूद जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट की। इसमें डॉक्‍टर दीनानाथ घायल हो गये।

मरीज के परिजनों द्वारा पिटाई के बाद जूनियर डॉक्टरों ने कामकाज ठप्प कर हड़ताल पर चले गये। वहीं, बढ़ते हंगामे को देखते हुए मौके पर पुलिस पहुंची। जूनियर डॉक्टरों द्वारा हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल में भर्ती मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे अस्‍पताल में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। डॉक्टरों की हडताल के कुछ ही देर बाद एक बच्चे ने इलाज के अभाव में दम तोड दिया। बच्चे की मौत के बाद से ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। 

बताया जा रहा है कि अधीक्षक और अन्‍य अधिकारी बैठक कर रहे हैं। बैठक में जूनियर डॉक्‍टरों को बुलाकर उन्‍हें मनाने की कोशिश की जा रही है। हड़ताल से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से बाधित हो गई है और मरीज के परिजन पलायन कर रहे हैं।

यहां उल्लेखनीय है कि पिछले माह नौ अगस्त, 2018 को राजधानी पटना स्थित एनएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों की भी मरीज के परिजनों द्वारा पिटाई की गई थी। इसके बाद वहां भी जूनियर डॉक्टर्स हडताल पर चले गये थे। प्रदेश के सबसे बडे अस्पताल में डॉक्टरों की हडताल पर जाने का यह तीसरी घटना है। जूनियर डॉक्टर तीन महीने में तीन बार हडताल पर गए हैं। डॉक्टरों की मानें तो हर बार अस्पताल प्रशासन के आश्वासन के बावजूद भी डॉक्टरों के साथ मार-पीट हो रहा है।

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