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बिहार: मां को खाना खिलाने के लिए नाबालिग लड़के ने की चोरी, जज ने सजा की बजाय दिलाए राशन और कपड़े

By भाषा | Updated: April 20, 2020 21:51 IST

बिहार के नालंदा में चोरी के मामले में एक 16 वर्षीय नाबालिग को जज ने सजा के बजाय राशन और कपड़े दिलाए।

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ठळक मुद्देपुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्रा के समक्ष पेश किया था।बच्चे ने बताया कि मां और छोटे भाई को कई दिन से भोजन नहीं मिला है, इसलिए उसने चोरी की।जज ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह किशोर को राशन और कपड़े उपलब्ध कराए।

बिहारशरीफ।बिहार के नालंदा जिला की एक अदालत ने चोरी के मामले में गिरफ्तार 16 वर्षीय किशोर से वजह जानने के बाद ना सिर्फ उसे आरोपमुक्त किया बल्कि पुलिस को निर्देश दिया कि वह किशोर को राशन और कपड़े उपलब्ध कराए।

किशोर को चोरी के आरोप में पुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्रा के समक्ष पेश किया था, वहां बच्चे से बात करने पर उन्हें पता चला कि उसके घर में मानसिक रूप से कमजोर विधवा मां और छोटा भाई है जिन्हें लॉकडाउन के कारण कई दिन से भोजन नहीं मिला है, इसलिए उसने चोरी की।

मिश्रा ने जब बच्चे से सुना कि उसने अपनी मां और भाई को भूख से बचाने के लिए चोरी कि लो वह भावुक हो गए और उसे चोरी के आरोप से मुक्त करते हुए प्रशासन को कहा कि वह तुरंत उसे राशन और कपड़े उपलब्ध कराए। दंडाधिकारी मिश्रा ने 17 अप्रैल को अधिकारियों को लड़के की मजबूरी को समझते हुए उसे आरोप मुक्त करते हुए उसके परिवार को सरकारी योजनाओं के तहत आवास, राशन आदि की हर संभव सहायता और सहायता प्रदान करने तथा पुलिस को चार महीने बाद किशोर की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।

इस्लामपुर पुलिस के आधिकारिक सूत्रों ने नाबालिग के एक स्थानीय बाजार में खरीदारी करने के दौरान एक महिला का पर्स छीन लेने पर किशोर को बाजार में लगे सीसीटीवी की मदद से पकड़ा था। नाबालिग अपनी माँ और भाई के साथ नालंदा जिले के इस्लामपुर थाना अंतर्गत खटोलना बिगहा गाँव में एक छोटे से फूस के घर (कच्ची झोपड़ी) में रहता है।

अदालत के निर्देश के बाद इस्लामपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रियदर्शी राजेश किशोर के गांव पहुंचे और उसे सभी सरकारी योजनाओं के साथ परिवार को सक्षम करने के लिए दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने के अलावा भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं प्रदान की।

संडा पंचायत, जिसके अंतर्गत किशोर का गाँव आता है, समिति के सदस्य संजय चौधरी ने कहा कि अदालत का यह आदेश न केवल शहर में लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ बल्कि इसको लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और नाबालिग को अपने में सुधार लाने का मौका देने के लिए अदालत की प्रशंसा कर रहे हैं।

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