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कश्मीरः सीजफायर के बीच एलओसी पर तनाव, भारतीय सेना अलर्ट पर, ‘लांचिंग पैडों’ को नेस्तनाबूद करने में जुटी

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: November 20, 2020 20:09 IST

 894 किमी लम्बी एलओसी पर, भारतीय सेना के निशाने और कुछ नहीं बल्कि पाक सेना की वे अग्रिम चौकिआं हैं जो आतंकियों के लिए एडवांस ट्रेनिंग कैम्पों के साथ-साथ उनके लिए ‘लांचिंग पैडों’ का कार्य कर रही हैं।

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ठळक मुद्देबंकर आतंकियों को सहारा देती रहती हैं तो भारतीय सेना के लिए कठिनाई यह पैदा हो जाती है कि वे आतंकवाद पर कैसे काबू पाएं। आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर भारतीय हमले के रूप में भी लेते हैं जिससे सेना को कोई एतराज नहीं है।भारतीय क्षेत्रों में धकेलने से पहले कुछ समय तक जिन सीमा चौकिओं और बंकरों में रखा जाता है उन्हें लांचिंग पैड कहा जाता है।

जम्मूः सीजफायर के बीच एलओसी पर युद्ध की घोषणा के बिना मिसाइलों का इस्तेमाल दरअसल पाक सेना की उन फारवर्ड पोस्टों को नेस्तनाबूद करने के लिए किया जा रहा है जो पिछले एक अरसे से आतंकियों को इस ओर धकेलने के लिए लांचिंग पैडों में बदल दी गई हैं।

स्पष्ट शब्दों में कहें तो पाकिस्तान से सटी 894 किमी लम्बी एलओसी पर, भारतीय सेना के निशाने और कुछ नहीं बल्कि पाक सेना की वे अग्रिम चौकिआं हैं जो आतंकियों के लिए एडवांस ट्रेनिंग कैम्पों के साथ-साथ उनके लिए ‘लांचिंग पैडों’ का कार्य कर रही हैं। रक्षा सूत्रों के अनुसार, ऐसे लांचिंग पैडों को नेस्तनाबूद करना आवश्यक हो गया था क्योंकि अगर यह सीमा चौकिआं और बंकर आतंकियों को सहारा देती रहती हैं तो भारतीय सेना के लिए कठिनाई यह पैदा हो जाती है कि वे आतंकवाद पर कैसे काबू पाएं।

हालांकि इन लांचिंग पैड रूपी सीमा चौकिओं को तबाह करने की कार्रवाई को कुछ आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर भारतीय हमले के रूप में भी लेते हैं जिससे सेना को कोई एतराज नहीं है। वह कहती है कि आप चाहें इसे कोई भी नाम दे सकते हैं लेकिन इतना अवश्य है कि ऐसे लांचिंग पैडों को तबाह करना आतंकवाद के नाश के लिए आवश्यक हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, जिन अग्रिम सीमा चौकिओं को ढहाया गया है उसे चाहे तो कोई नाम दिया जा सकता है लेकिन सच्चाई यही है कि इन सीमा चौकिओं और बंकरों का इस्तेमाल पाक सेना द्वारा आतंकियों को इस ओर धकेलने के लिए लांचिंग पैड के रूप में किया जाता था। सूत्रों के अनुसार, पाक कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकियों के टेªनिंग कैम्पों में आतंकियांें को प्रशिक्षण देने के उपरांत उन्हें भारतीय क्षेत्रों में धकेलने से पहले कुछ समय तक जिन सीमा चौकिओं और बंकरों में रखा जाता है उन्हें लांचिंग पैड कहा जाता है।

ऐसे में रक्षाधिकारियों के मुताबिक, एलओसी पर पाक गोलाबारी का जवाब देने की खातिर अब तोपखानों के साथ ही टैंकरोधी मिसाइलों का भी खुल कर इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसा, पाकिस्तान तथा पाक कब्जे वाले कश्मीर पर भीतर तक तथा सटीक मार करने के लिए है। और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इन तोपखानों के निशाने पाक सेना की वे अग्रिम सीमा चौकिआं हैं जहां से एडवासं टेªनिंग प्राप्त करने के बाद आतंकियों को इस ओर धकेला जाता है छोटे छोटे दलों में।

सेनाधिकारियों के अनुसार, देखा जाए तो आज पाक सेना ने प्रत्येक अग्रिम सीमा चौकी तथा अग्रिम बंकरों को बतौर लांचिंग पैड इस्तेमाल करना आरंभ कर दिया है। ऐसा करने के पीछे का कारण यह है कि पाक सेना एलओसी तथा इंटरनेशनल बार्डर के प्रत्येक भाग का इस्तेमाल आतंकियों को इस ओर धकेलने के लिए करना चाहती है ताकि बाद में आतंकी उन क्षेत्रों में तबाही मचा सकें, जहां से वे घुसने में कामयाब रहते हैं। हाल ही में गिरफ्तार तथा मारे गए आतंकियों के कब्जे से बरामद दस्तावेजों से हुए रहस्योदघाटनों के बाद, ऐसी चौकिओं पर हमले तेज भी हुए हैं।

विशेषकर एलओसी से सटी हुई अग्रिम चौकिओं पर जहां से आतंकियों को इस ओर धकेला जा रहा है। इन रहस्योदघाटनों में यह भी कहा गया है कि इन अग्रिम सीमा चौकिओं पर आतंकी एडवांस टेªनिंग प्राप्त करते हैं और फिर उन्हें गाइड की मदद से इस ओर भिजवाया जाता है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, अग्रिम सीमा चौकिओं का इस्तेमाल एडवांस ट्रेनिंग कैम्पों तथा लांचिंग पैडों के रूप में किया जा रहा है इस प्रकार की खबरें एक लम्बे अरसे से आ रही थीं और इन खबरों के पश्चात ही पहली बार भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक भी की थी।

सूत्र बताते हैं कि इन लांचिंग पैडों के भीतर भी आतंकियों को भारतीय सेना पर गोलीबारी तथा गोलाबारी करना सिखाया जाता है और अगर वे आतंकियों को भारतीय क्षेत्रों में धकेलने में नाकामयाब रहते हैं तो ये लांचिग पैड उनके लिए बढ़िया शरणस्थल के बतौर भी कार्य करते हैं।

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