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जम्मू कश्मीर: 2017 के बाद से अधिकारियों द्वारा पत्रकारों के उत्पीड़न की कोई घटना नहीं हुई, सरकार ने संसद में किया दावा

By विशाल कुमार | Updated: April 8, 2022 11:14 IST

तृणमूल कांग्रेस के सांसद अबीर रंजन बिस्वास द्वारा राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए ठाकुर ने यह दावा किया। पश्चिम बंगाल के सांसद ने जानना चाहा कि क्या सरकार को जम्मू कश्मीर में समाचार मीडिया पर हाल ही में जारी प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की फैक्ट फाइंडिंग समिति की रिपोर्ट के बारे में पता है?

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ठळक मुद्देपिछले महीने समिति ने पाया कि राज्य में मीडिया प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण दबा हुआ है।ठाकुर ने बताया कि केंद्र ने जम्मू कश्मीर में किसी भी समाचार मीडिया पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है।ठाकुर ने इस निष्कर्ष से इनकार किया कि कई सरकारी कार्यालयों में जनसंपर्क का काम पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।

नई दिल्ली: सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को संसद को बताया कि केंद्र ने जम्मू कश्मीर में किसी भी समाचार मीडिया पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है।

2017 से अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न का शिकार होने वाले जम्मू कश्मीर के पत्रकारों की संख्या के बारे में पूछे जाने पर ठाकुर ने दावा किया कि गृह मंत्रालय ने सूचित किया है कि 2017 के बाद से अधिकारियों द्वारा मीडियाकर्मियों के किसी भी तरह के उत्पीड़न की कोई घटना नहीं हुई है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां, किसी भी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ उनके पेशे के साथ भेदभाव किए बिना कार्रवाई करती हैं, जो देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल पाया जाता है। ठाकुर ने इस निष्कर्ष से इनकार किया कि कई सरकारी कार्यालयों में जनसंपर्क का काम पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद अबीर रंजन बिस्वास द्वारा राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए ठाकुर ने यह दावा किया। पश्चिम बंगाल के सांसद ने जानना चाहा कि क्या सरकार को जम्मू कश्मीर में समाचार मीडिया पर हाल ही में जारी प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की फैक्ट फाइंडिंग समिति की रिपोर्ट के बारे में पता है?

पिछले महीने, समिति ने पाया कि जम्मू कश्मीर क्षेत्र में समाचार मीडिया, विशेष रूप से घाटी में, धीरे-धीरे मुख्य रूप से स्थानीय प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों के कारण दबा हुआ है।

दरअसल, भारतीय प्रेस परिषद ने जम्मू कश्मीर में मीडिया की स्थिति का अध्ययन करने के लिए सितंबर, 2021 में समिति का गठन किया। कमेटी ने 8 मार्च को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

फैक्ट फाइंडिंग समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि व्यक्तिगत रूप से प्रताड़ित किए गए पत्रकारों की एक लंबी सूची है। इसका उद्देश्य सरकारी लाइन का पालन करने के लिए भय और धमकी पैदा करना है।

रिपोर्ट में कहा गया था कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने समिति से साफ रूप से कहा है कि कई पत्रकार राष्ट्र विरोधी प्रवृत्ति के थे। पुलिस ने समिति से स्वीकार किया कि 2016 से अब तक 49 पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है और उन पर आरोप लगाए गए हैं। इनमें से 8 को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया है।

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