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एलओसी पर एक और जवान शहीद, 2021 में अभी तक चार जवान हुए हैं शहीद, गोलीबारी से सीमावासी परेशान

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 4, 2021 15:24 IST

पाकिस्तान की सेना ने संघर्ष विराम का उल्लंघन कर जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा से लगी अग्रिम चौकियों को निशाना बनाकर गोलीबारी की है।

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ठळक मुद्देसाल 2020 में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम के उल्लंघन के 5,400 से अधिक मामले सामने आए थे।पाकिस्तान की सेना ने बुधवार को भी सुंदरबनी में बिना उकसावे के संघर्ष विराम का उल्लंघन कर फायरिंग शुरू कर दी।हमले में लक्ष्मण गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई। जवानों ने भी इस गोलीबारी का करारा जवाब दिया।

जम्मूः एलओसी पर पाक गोलीबारी में एक और भारतीय जवान की जान चली गई है। इस साल अभी तक चार जवानों की जानें एलओसी पर हुई गोलीबारी में कई है।

इस बीच एलओसी पर गोलीबारी के तेज होते ही सीमावासियों ने अब मांग करनी शुरू की है कि उन्हें बंकर नहीं पांच मरले के प्लाट सुरक्षित इलाकों में दिए जाएं। इसके प्रति पूर्ववर्ती सरकारें कई बार वादा कर चुकी हैं। रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि राजौरी जिले के पास पाकिस्तानी गोलीबारी में सेना का एक जवान शहीद हो गया।

लगातार गोलीबारी में इस साल अब तक चार जवान शहीद हो चुके हैं

रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि एलओसी पर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर पड़ोसी देश द्वारा की जा रही लगातार गोलीबारी में इस साल अब तक चार जवान शहीद हो चुके हैं। आज शहीद होने वाले सिपाही लक्ष्मण जोधपुर के रहने वाले थे। प्रवक्ता के मुताबिक, पाकिस्तान की सेना ने बुधवार को भी सुंदरबनी में बिना उकसावे के संघर्ष विराम का उल्लंघन कर फायरिंग शुरू कर दी।

इस हमले में लक्ष्मण गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई। जवानों ने भी इस गोलीबारी का करारा जवाब दिया। प्रवक्ता ने बताया, सिपाही लक्ष्मण एक बहादुर, प्रेरणादायी और समर्पित जवान थे। देश उनकी शहादत और कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा को हमेशा याद रखेगा। इसी साल जनवरी में पाकिस्तानी गोलीबारी में सेना के तीन जवान शहीद हुए थे। 

सीमा पर बसे लोगों को पांच मरले के प्लाट देने की शुरुआत भी हुई थी

इस बीच कुछ दशक पहले सीमा पर बसे लोगों को पांच मरले के प्लाट देने की शुरुआत भी हुई थी लेकिन बाद में यह प्रक्रिया रुक गई। और अब सीमावासियों ने इसके प्रति एक बार फिर मांग उठानी आरंभ की है। उन्होंने इसके प्रति कहा हे कि उनकी जरूरत सीमा पर बनाए जाने वाले बंकर नहीं बल्कि सुरक्षित इलाकों में बसने के लिए प्लाट हैं।

याद रहे पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा ऐसे वायदे किए गए थे और कुछ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर प्लाट आबंटित भी किए गए थे। वैसे इस समय सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को पाकिस्तान की गोलाबारी से बचाने के लिए बंकर बनाने का कार्य जोर-शोर से जारी है। पर अब सीमावासी कहते हैं कि बंकर बनाना समस्या का स्थाई समाधान नहीं है।

पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी जारी रहेगी व बंकर बनने के बाद भी अचानक गोलाबारी से लोगों को नुकसान होता है। ऐसे में सरकार को लोगों को पाकिस्तान की गोलाबारी से बचाने के लिए कोई स्थाई हल निकालना चाहिए। उनकी मांग है कि सीमा के साथ सटे गांवों की पहचान कर सबसे पहले वहां के लोगों को सुरक्षित जगह पर बसाया जाए।

टॅग्स :भारतीय सेनाजम्मू कश्मीरपाकिस्तान
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