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लखीमपुर मामले की जांच के लिए जांच आयोग गठित : प्रियंका ने की सेवारत न्यायाधीश से जांच कराने की मांग

By भाषा | Updated: October 7, 2021 17:53 IST

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लखनऊ, सात अक्टूबर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में गत रविवार को हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने जांच आयोग गठित कर दो महीने में रिपोर्ट देने को कहा है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश को आयोग के एकमात्र सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से नहीं बल्कि सेवारत न्यायाधीश से कराने की मांग की है।

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में बताया, ‘‘आयोग के गठन के लिए एक अधिसूचना जारी कर दी गई है। आयोग को मामले की जांच के लिए दो महीने का समय दिया गया है। इस मामले की जांच इलाहाबाद उच्च न्यायालय के (सेवानिवृत्त) न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव करेंगे।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने जांच आयोग अधिनियम, 1952 (1952 की अधिनियम संख्या 60) की धारा तीन द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के (सेवानिवृत्त) न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को एकल सदस्य आयोग के रूप में नियुक्त किया है।

बयान में कहा गया है, ‘‘आयोग इस अधिसूचना के जारी होने की तारीख से दो महीने की अवधि के भीतर जांच पूरी करेगा। इसके कार्यकाल में कोई भी बदलाव सरकार के आदेश पर होगा।’’

गौरतलब हैं कि लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया क्षेत्र में गत रविवार को हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगो की मौत हो गई थी। इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य अभियुक्त हैं। इस मामले को लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर है।

इस बीच प्रियंका गांधी ने लखीमपुर मामले की जांच सेवानिवृत न्यायाधीश से नहीं बल्कि किसी सेवारत न्यायाधीश से कराने की मांग की है।

मृतक किसानों के परिजनों से मिलने बहराइच जाने से पहले प्रियंका गांधी ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘मेरे नजरिये में ही नहीं परिवारों के नजरिये से भी इस मामले की सेवानिवृत्त न्यायाधीश से नहीं बल्कि उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायायालय के मौजूदा न्यायाधीश से जांच होनी चाहिये। मैं जांच पर टिप्पणी नहीं करना चाहती क्योंकि यह अभी शुरू ही नहीं हुई है। मगर मैं इतना कह सकती हूं कि अगर जांच निष्पक्ष करनी है तो उस मंत्री (गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा) को इस्तीफा देना पड़ेगा क्योंकि वह गृह मंत्री हैं और यह सब उन्हीं के अन्तर्गत आता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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