India will try again for membership in NSG's full session | एनएसजी के पूर्ण अधिवेशन में सदस्यता के लिए भारत फिर करेगा प्रयास

नई दिल्ली , 15  जून: लातविया में 48 देशों के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की हो रही दो दिवसीय बैठक में एनएसजी का हिस्सा बनने के लिए भारत अपना प्रयास तेज करेगा। 

भारत ने 2016 में एनएसजी सदस्यता के लिए आवेदन किया था लेकिन चीन ने बाधा खड़ी कर दी थी। उसका कहना था कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं कर रखे हैं। 

नयी दिल्ली को अमेरिका , रूस और फ्रांस जैसे देशों से समर्थन मिल सकता है जो इस क्लब में उसे शामिल करने के पुरजोर पक्षधर हैं। भारत के सभी तीनों निर्यात नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं -- मिसाइल टेक्निकल कंट्रोल रिजीम (2016 में), आस्ट्रेलिया ग्रुप (2017 में) तथा वासेनार अरेंजमेंट (2018 में) का सदस्य बन जाने के बाद एनएसजी का यह पहला अधिवेशन है। संयोग से चीन इन तीनों समूहों में नहीं है। 

भारत अपनी सदस्यता के संदर्भ में चीन के एतराज को लेकर उससे लगातार संपर्क करता रहा है। दस अप्रैल को विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (निरस्त्रीकरण एवं अंतररष्ट्रीय सुरक्षा) पंकज शर्मा ने चीन के शीर्ष वार्ताकार एवं वहां की सरकार में निरस्त्रीकरण संभाग के प्रमुख वांग शून से बातचीत की थी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग वुहान और चिंगदाओ में दो बार विविध मुद्दों पर चर्चा कर चुके हैं।  एनएसजी में भारत की सदस्यता को चीन से समर्थन मिलने की संभावना नहीं है क्योंकि चीन भारत और पाकिस्तान की सदस्यता कोशिश के साथ समान बर्ताव चाहता है। 


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