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भारत की सॉवरेन रेटिंग 'जंक' में बदलने का आशंका, सरकार ने नकारात्मक प्रतिक्रियाओं के जवाब में तैयार किया मसौदा

By विशाल कुमार | Updated: May 9, 2022 09:20 IST

जून, 2020 में वित्त मंत्रालय में तत्कालीन प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने एक प्रजेंटेशन तैयार किया था। जिसमें भारत की सॉवरेन रेंटिग को प्रभावित करने वाले कारकों और उसके लिए उठाये जाने वाले कदम के बारे बताया गया था। सान्याल अब प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्य हैं।

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ठळक मुद्देवैश्विक थिंक टैंकों, सूचकांकों और मीडिया की नकारात्मक प्रतिक्रियाओं से चिंतित सरकार।वित्त मंत्रालय के आर्थिक विभाग ने नकारात्मक प्रतिक्रियाओं के जवाब में एक 'नैरेटिव मैनेजमेंट' मसौदा तैयार किया है।यह मसौदा कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान साल 2020 के मध्य में तैयार किया गया था।

नई दिल्ली: वैश्विक थिंक टैंकों, सूचकांकों और मीडिया की नकारात्मक प्रतिक्रियाओं के कारण भारत को अपनी सॉवरेन रेटिंग के गिरकर 'जंक' (कूड़ा) में बदलने का डर सता रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यही कारण है कि वित्त मंत्रालय के आर्थिक विभाग ने इन नकारात्मक प्रतिक्रियाओं के जवाब में एक 'नैरेटिव मैनेजमेंट' मसौदा तैयार किया है। यह मसौदा कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान साल 2020 के मध्य में तैयार किया गया था।

जून, 2020 में वित्त मंत्रालय में तत्कालीन प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने एक प्रजेंटेशन तैयार किया था। जिसमें भारत की सॉवरेन रेंटिग को प्रभावित करने वाले कारकों और उसके लिए उठाये जाने वाले कदम के बारे बताया गया था। सान्याल अब प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्य हैं।

36 पेज के इस प्रजेंटेशन में कहा गया है कि किसी देश की सॉवरेन रेटिंग के 18-26 प्रतिशत प्रभावी कारकों में उस देश में चल रहे शासन, राजनीतिक स्थिरता, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, मीडिया की आजादी का आंकलन शामिल होता है।

प्रजेंटेशन में सान्याल ने कहा कि सॉवरेन रेटिंग को जंक ग्रेड में जाने से बचाने के लिए वैश्विक थिंक-टैंक और सर्वेक्षण एजेंसियों तक पहुंचना और सामान्य रूप से भारत की सकारात्मक छवि बनाये रखना काफी जरूरी है।

गौरतलब है कि 2019-20 में अधिकांश रिपोर्टों में भारत को लेकर नकारात्मक टिप्पणी होने का अनुमान लगाया गया था। खास तौर पर, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019, नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019, एनआरसी और पीएम मोदी और भाजपा की हिंदू राष्ट्रवादी राजनीति, मंदिर निर्माण को लेकर भारत के खिलाफ नकारात्मक टिप्पणी होने का अनुमान लगाया गया।

बता दें कि विभिन्न देशों की सरकारों की उधार चुकाने की क्षमता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां सॉवरेन रेटिंग का निर्धारण करती हैं। इसे तय करने में अर्थव्यवस्था, बाजार और राजनीतिक जोखिम को आधार माना जाता है। 

रेटिंग से पता चलता है एक देश आने वाले समय में अपने कर्जे चुका सकेगा या नहीं? इसमें निवेश के लिए सबसे अच्छे ग्रेड से लेकर जंक ग्रेड तक की रेंटिंग होती है।

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