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30-34 साल के करियर में केवल एक ही पदोन्नति?, सीआईएसएफ के 500 से अधिक निरीक्षकों ने “निष्पक्ष” कैडर समीक्षा की मांग की

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 15, 2026 21:58 IST

अदालत ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) का निस्तारण करते हुए सीआईएसएफ की कैडर समीक्षा तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया है।

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ठळक मुद्देबल में लगभग 3,000 निरीक्षक और लगभग 17,000 एसआई हैं।मनोबल में गिरावट और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन” झेलना पड़ रहा है।पदोन्नति न मिलने की वजह पदोन्नति के कोटे में सही व्यवस्था की कमी है।

नई दिल्लीः केंद्रीय औद्योगिकी सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 500 से अधिक निरीक्षकों के एक समूह ने समयबद्ध पदोन्नति सुनिश्चित करने के लिए “निष्पक्ष” कैडर समीक्षा की मांग की है। निरीक्षकों का दावा है कि उन्हें 30 से 34 साल के अपने करियर में केवल एक ही पदोन्नति मिलती है। अधिकारियों की ओर से सीआईएसएफ मुख्यालय को भेजे गए कई पत्र देखे हैं, जिनमें दो फरवरी को उनके अनुकूल दिए गए उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया है। अदालत ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) का निस्तारण करते हुए सीआईएसएफ की कैडर समीक्षा तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया है।

सीआईएसएफ में निरीक्षकों की भर्ती शुरुआत में उप-निरीक्षक (एसआई) के रूप में होती है। इसके बाद पदोन्नति पाकर वे निरीक्षक बनते हैं और अगला स्तर सहायक कमांडेंट (एसी) का होता है, जो शुरुआती स्तर का राजपत्रित अधिकारी पद है। फिलहाल बल में लगभग 3,000 निरीक्षक और लगभग 17,000 एसआई हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निरीक्षक से लेकर एसी रैंक के पद तक पदोन्नति में रुकावट थी। उन्होंने कहा कि कई कर्मी तीन दशक से अधिक समय की “बेदाग” सेवा के बाद भी केवल एक पदोन्नति (निरीक्षक तक) पाकर सेवानिवृत्त हो रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इससे उन्हें “गंभीर नुकसान, मनोबल में गिरावट और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन” झेलना पड़ रहा है।

संपर्क किए जाने पर सीआईएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ग्रुप ‘ए’ सेवा अधिकारियों की कैडर समीक्षा “जारी” है और यह प्रक्रिया सभी वर्गों के कर्मचारियों को ध्यान में रखते हुए “निष्पक्ष” तरीके से की जाएगी। निरीक्षकों का कहना है कि उन्हें लंबे समय तक पदोन्नति न मिलने की वजह पदोन्नति के कोटे में सही व्यवस्था की कमी है।

उनका यह भी कहना है कि अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की तुलना में उनकी रैंक की स्थिति में असमानता है। साथ ही, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के कैडर प्रबंधन से जुड़े नियमों का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है। निरीक्षकों का कहना है कि वे आगे चलकर ग्रुप ‘ए’ (राजपत्रित) अधिकारी बनने की कतार में होते हैं, इसलिए जब इस सेवा की कैडर समीक्षा होती है।

तो उसका सीधा असर उन पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उनकी समस्याओं और मांगों पर भी इस प्रक्रिया के दौरान ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे अन्य सीएपीएफ की तरह उनके साथ भी समानता कायम करने की मांग की।

लगभग 32 वर्ष से सेवाएं दे रहे एक निरीक्षक ने कहा, “यह हमारे लिए लंबी लड़ाई रही है। उच्चतम न्यायालय को हमारी दलीलों में दम लगा और उसने स्वीकार किया है कि समय पर पदोन्नति न मिलने के कारण हमारे करियर में ठहराव आता है। हमें उम्मीद है कि इस बार हमारे साथ न्याय होगा, इसलिए हमने मुख्यालय से निष्पक्ष निर्णय लेने की अपील की है।”

लगभग दो लाख कर्मियों वाला सीआईएसएफ केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, जो बिजली, परमाणु ऊर्जा और एयरोस्पेस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ-साथ संसद और प्रमुख यात्री हवाई अड्डों को सुरक्षा प्रदान करता है।

टॅग्स :CISFकोर्टcourt
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