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झारखंड की तर्ज पर बिहार में भी आरक्षण की सीमा बढ़ाए जाने की मांग को लेकर गरमाने ने लगी सियासत

By एस पी सिन्हा | Updated: November 22, 2022 15:16 IST

राज्य में महागठबंधन की सहयोगी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने कहा है कि बिहार से ही अलग हुए झारखंड ने जिस तरह आरक्षण का दायरा बढ़ाया है, वैसी ही हिम्मत बिहार सरकार को भी दिखानी चाहिए।

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ठळक मुद्देहम ने कहा- झारखंड की तरह बिहार सरकार को भी आरक्षण का दायरा बढ़ाना चाहिएनंदलाल मांझी ने राज्य मे आरक्षण की सीमा 60 से बढ़ा कर 77 प्रतिशत करने की मांग की

पटना: झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार के द्वारा राज्य में ओबीसी आरक्षण का कोटा 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिये जाने के बाद बिहार में भी सियासत गर्माने लगी है। अब बिहार में भी आरक्षण की सीमा बढ़ाये जाने की मांग जोर पकड़ रही है। राज्य में सत्तारुढ़ महागठबंधन के सहयोगी दल इसके लिये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर दवाब बना रहा है।

राज्य में महागठबंधन की सहयोगी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने कहा है कि बिहार से ही अलग हुए झारखंड ने जिस तरह आरक्षण का दायरा बढ़ाया है, वैसी ही हिम्मत बिहार सरकार को भी दिखानी चाहिए। बता दें कि हाल ही में झारखंड विधानसभा में पारित एक विधेयक के अनुसार अब एससी को 28 फीसदी, एसटी को 12 फीसदी और आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया है। 

इस तरह से झारखंड में अब कुल 77 प्रतिशत आरक्षण होगा। अभी यह 66 प्रतिशत है। आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग को 10 फीसदी आरक्षणण देने के सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी आरक्षण की सीमा बढ़ाये जाने की आवश्यकता जताई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसकी सीमा 50 प्रतिशत को बरकरार रखा है। लेकिन अनेक राज्य सरकारों ने अपने राज्य में आरक्षण की सीमा बढ़ाई है। 

सामाजिक न्याय के नाम पर राजनीति करने वाले विभिन्न दलों के नेताओं का तर्क है कि फिलहाल छत्तीसगढ़ में 82, तमिलनाडु में 69, महाराष्ट्र में 65 और मध्य प्रदेश में कुल 73 प्रतिशत आरक्षण है। ऐसे में बिहार में आरक्षण की सीमा क्यो नहीं बढ़ायी जा सकती है? बिहार में अभी कुल 60 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसमे आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण शामिल है। 

हम के नेता नंदलाल मांझी का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछड़ों के नेता माने जाते हैं। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी गरीबों के हितैषी हैं। इन दोनों को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए। मांझी ने राज्य मे आरक्षण की सीमा 60 से बढ़ा कर 77 प्रतिशत करने की मांग की है ताकि अब तक वंचित रहे लोगों को भी इसका लाभ मिले और वे समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। इस तरह से बिहार में भी अब आरक्षण की सीमा बढाये जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

टॅग्स :आरक्षणबिहारहिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेकुलर)
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