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विश्व में कुल बाल वधुओं में से आधी भारत सहित पांच देशों में: यूनिसेफ

By भाषा | Updated: March 8, 2021 18:22 IST

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नयी दिल्ली, आठ मार्च दुनिया की कुल बाल वधुओं में से लगभग आधी भारत सहित पांच देशों में हैं। यह जानकारी यूनिसेफ द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जारी एक नये विश्लेषण से सामने आयी है।

‘कोविड​​-19: ए थ्रेट टू प्रोग्रेस अगेंस्ट चाइल्ड मैरिज’ विषयक विश्लेषण के अनुसार दशक के अंत से पहले एक करोड़ अतिरिक्त बाल विवाह हो सकते हैं। इससे इस प्रथा को कम करने की वर्षों की प्रगति को खतरा उत्पन्न हो सकता है।

विश्लेषण के अनुसार, दुनिया भर में आज जीवित अनुमानित 65 करोड़ लड़कियों और महिलाओं का विवाह बचपन में हुआ था। इनमें से आधी संख्या बांग्लादेश, ब्राजील, इथियोपिया, भारत और नाइजीरिया में है।

इसमें कहा गया है कि कोविड​​-19 के प्रभावों को समाप्त करने और सतत विकास लक्ष्यों में निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक 2030 तक इस प्रथा को समाप्त करने के लिए प्रगति में काफी तेजी होनी चाहिए।

यूनिसेफ कार्यकारी निदेशक हेनरीता फोर ने कहा, ‘‘इस महामारी को एक वर्ष हो गया है, लड़कियों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। स्कूलों को फिर से खोलकर, प्रभावी कानून और नीतियां लागू करके, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करके तथा परिवारों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा उपाय प्रदान करके हम बाल विवाह के जरिए एक लड़की से उसका बचपन छीने जाने के जोखिम को काफी कम कर सकते हैं।’’

पिछले दशक में औसतन 2.5 करोड़ बाल विवाह होने से रोके गए और यूनिसेफ ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर चेतावनी दी कि ये लाभ अब गंभीर खतरे में हैं।

यूनिसेफ ने अपनी पिछली रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की तीन में से एक बाल वधु भारत में रहती है।

संयुक्त राष्ट्र के निकाय ने कहा कि बाल विवाह का जारी रहना भारत के लिए 2030 तक सतत विकास लक्ष्य 5 प्राप्त करने में एक संभावित चुनौती है क्योंकि पिछले एक दशक के दौरान इसकी प्रगति दक्षिण एशिया के देशों में सबसे मजबूत रही है।

यूनिसेफ इंडिया प्रतिनिधि यास्मीन अली हक ने कहा, ‘‘भारत में बाल विवाह को समाप्त करने के लिए हमें सबसे गरीब और इस लिहाज से सबसे अधिक जोखिम में रहने वाली लड़कियों और उनके परिवारों पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखना चाहिए। बाल विवाह उन्मूलन प्रयासों को कोविड-19 प्रतिक्रिया और बहाली योजनाओं में एकीकृत किया जाना चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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