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पूर्व राष्ट्रपति ओलांद के बाद मौजूदा राष्ट्रपति मैक्रों ने दी राफेल डील पर सफाई, झाड़ा पल्ला

By पल्लवी कुमारी | Updated: September 26, 2018 20:35 IST

इससे पहेल राफेल विमान सौदे में ‘ऑफसेट पार्टनर’ के संदर्भ में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के कथित बयान भी आ चुका है।

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नई दिल्ली, 26 सिंतबर: राफेल डील पर जारी विवादों के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि जिस वक्त राफेल डील हुई, मैं राष्ट्रपति नहीं था। राफेल करार ‘सरकार से सरकार’ के बीच तय हुआ था। भारत और फ्रांस के बीच 36 लड़ाकू विमानों को लेकर सौदा हुआ है।  फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यह बात संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के इतर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। यहां मैक्रों से पूछा गया था कि क्या भारत सरकार ने किसी वक्त फ्रांस सरकार या फ्रांस की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी से कहा था कि उन्हें राफेल करार के लिए भारतीय साझेदार के तौर पर रिलायंस को चुनना है। पत्रकारों के सवालों के जवाब में भारतीय उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी को करार में हिस्सेदार बनाने के बारे में कोई स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए मैक्रों ने सिर्फ इतना ही कहा कि राफेल करार ‘सरकार से सरकार’ के बीच तय हुआ था। उन्होंने कहा कि भारत एवं फ्रांस के बीच 36 लड़ाकू विमानों को लेकर जब अरबों डॉलर का यह करार हुआ , उस वक्त वह सत्ता में नहीं थे।

माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने दिया बयान

इमैनुएल मैक्रों के इस बयान के बाद माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने लड़ाकू विमान राफेल की खरीद के सौदे में घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा है कि फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने भी इस सौदे के बारे में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान को सच बताया है। येचुरी ने बुधवार को ट्वीट कर कहा ''सच सामने आ गया है। मैक्रों ने यह साफ कर दिया है कि राफेल सौदे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत करने वाले तत्कालीन राष्ट्रपति ओलांद ने जो कुछ कहा, वह सच है।'' 

 पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का बयान 

इससे पहेल राफेल विमान सौदे में ‘ऑफसेट पार्टनर’ के संदर्भ में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के कथित बयान आया था। फ्रांसीसी मीडिया के मुताबिक ओलांद ने कथित तौर पर कहा है कि भारत सरकार ने 58,000 करोड़ रुपये के राफेल विमान सौदे में फ्रांस की विमान बनाने वाली कंपनी दसाल्ट एविएशन के ऑफसेट साझेदार के तौर पर रिलायंस डिफेंस का नाम प्रस्तावित किया था और ऐसे में फ्रांस के पास कोई विकल्प नहीं था।

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