पटना: बिहार से राज्यसभा के चुनाव में कांग्रेस के तीन विधायकों के द्वारा महागठबंधन के उम्मीदवार को वोट नहीं दिए जाने के बाद गरमायी सियासत के बीच कांग्रेस के बागी विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने रविवार को बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी से मुलाकात की है। दरअसल कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा अचानक अशोक चौधरी के आवास पर पहुंच गए। राज्यसभा चुनाव में अपनी ही पार्टी को ‘गच्चा’ देने वाले विधायक सुरेंद्र कुशवाहा की इस मुलाकात को महज शिष्टाचार भेंट मानना मुश्किल है। इस अचानक हुई मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
वहीं, माना जा रहा है कि सुरेंद्र कुशवाहा जल्द ही औपचारिक रूप से एनडीए का दामन थाम सकते हैं। खासकर ऐसे समय में जब वे पहले ही पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते नजर आ चुके हैं। इस मुलाकात के बाद दोनों ही नेताओं ने मीडिया से दूरी बनाए रखी, पीछे के दरवाजे से निकल गए और कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। लेकिन विधानसभा की बदलती परिस्थितियों और राज्यसभा चुनाव में एनडीए की ‘क्लीन स्वीप’ जीत के बाद इस मुलाकात के मायने साफ नजर आ रहे हैं। बता दें कि सुरेंद्र कुशवाहा पिछले काफी समय से अपनी पार्टी कांग्रेस की लाइन से अलग चल रहे हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने और कांग्रेस के दो अन्य विधायकों ने राजद उम्मीदवार को वोट न देकर सबको चौंका दिया था।
इसके बाद उन्होंने एक विवादित बयान देकर आग में घी डालने का काम किया था। कुशवाहा ने खुलकर कहा था कि राजद ने ‘भूमिहार’ उम्मीदवार को मैदान में उतारा था, जो उन्हें पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने वोट नहीं दिया। इस कदम के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें नोटिस भी जारी किया था।
हालांकि, पार्टी की ओर से भेजे गए नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण उनके ऊपर कार्रवाई की संभावना लगातार बनी हुई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी कारण कांग्रेस और उनके बीच दूरी बढ़ती जा रही थी। ऐसे माहौल में उनका अचानक मंत्री अशोक चौधरी से मुलाकात करने पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के अंदर भी इस मुद्दे को लेकर असहजता देखी जा रही है। पार्टी पहले ही उनके रवैये से नाराज बताई जा रही थी, और अब इस नई मुलाकात ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। हालांकि अभी तक न तो सुरेंद्र कुशवाहा और न ही अशोक चौधरी की ओर से इस मुलाकात पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।
इसबीच पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महागठबंधन के उम्मीदवार के समर्थन में उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ काम किया, लेकिन कुछ विधायकों के रुख पर पार्टी नेतृत्व ही अंतिम निर्णय लेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन की राजनीति में सभी दलों की अपनी-अपनी भूमिका होती है और उसी के अनुसार निर्णय लिए जाते हैं।
कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी कलह और संगठन की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात हर कांग्रेसी के लिए पीड़ादायक हैं। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी आलाकमान समय आने पर इस स्थिति से निपटने के लिए ठोस कदम उठाएगा। “ऐसे नहीं छोड़ा जाएगा।”