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यूरोपीय संघ ने चीन से निपटने के लिये तीन सीमा रेखाएं तय की : पुर्तगाल के विदेश मंत्री

By भाषा | Updated: June 23, 2021 20:50 IST

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नयी दिल्ली, 23 जून पुर्तगाल के विदेश मंत्री अगस्तो सांतोस सिल्वा ने बुधवार को कहा कि चीन से निपटने के लिये यूरोपीय संघ ने तीन सीमा रेखाएं तय की हैं जिसमें शिंजियांग प्रांत में मानवाधिकारों के उल्लंघन, हांगकांग में लोकतांत्रिक दायरे को संकुचित करने तथा दक्षिण चीन सागर में यथास्थिति में बदलाव को स्वीकार नहीं करना शामिल है ।

पुर्तगाल वर्तमान में 27 देशों की सदस्यता वाले यूरोपीय संघ की अध्यक्षता कर रह है और इसे वैश्विक स्तर पर एक ताकतवर समूह माना जाता है ।

डिजिटल माध्यम से आयोजित सम्मेलन को विदेश मंत्री एस जसशंकर के साथ संबोधित करते हुए सिल्वा ने कहा कि भारत राजनीतिक संबंधों के दृष्टिकोण से एशिया में यूरोपीय संघ का महत्वपूर्ण साझेदार है । उन्होंने इस संबंध में दोनों पक्षों के उदार लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लेख किया ।

चीन के उभरने और अमेरिका में नये प्रशासन के कार्यभार संभालने के परिप्रेक्ष में भूराजनीतिक स्थिति से संबंधित एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी देश का उभरना महत्वपूर्ण ‘परिवर्तनकारी रूझान’ है ।

उन्होंने कहा कि वह कहेंगे कि पिछले 10 साल से ही नही बल्कि पिछले 25 वर्षो में चीन का उभरना एक महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी रूझान है ।

आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, ‘‘ इसलिये इसका सभी को ध्यान रखना चाहिए । अमेरिका और खासतौर पर बाइडेन प्रशासन की क्या भूमिका होगी, यह भी काफी स्वभाविक है । मैं कहूंगा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बाइडेन प्रशासन का रूख इस समझ को लेकर खुला है कि दुनिया बहुध्रुवीय है और यह काफी हद तक समसामयिक एजेंडा है । ’’

उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ भारत के संबंध पिछले छह महीने में आगे बढ़े हैं ।

वहीं, पुर्तगाल के विदेश मंत्री सिल्वा ने चीन के साथ यूरोपीय संघ के संबंधों को ‘जटिल और बहुआयामी’ करार देते हुए कहा कि समूह उस देश के साथ जलवायु परिवर्तन सहित कुद क्षेत्रों में करीबी सहयोगी है ।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ ने चीन से निपटने के लिये तीन सीमाएं तय की हैं ।

सिल्वा ने कहा, ‘‘ हम चुप नहीं रह सकते जब शिंजियांग प्रांत में मानवाधिकारों का उल्लंधन होता हो, हम इसकी निंदा करते हैं । दूसरा, हम हांगकांग मे लोकतांत्रिक दायरे को संकुचित करने को स्वीकार नहीं का सकते । और हम दक्षिण चीन सागर और ताइवान के संबंध में यथास्थिति में बदलाव को स्वीकार नहीं कर सकते । ’’

उन्होंने कहा कि हमें काफी सचेत और विवेकशील रहते हुए दृढ रहने की जरूरत है ।

गौरतलब है कि चीन को अपने शिंजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों के साथ खराब व्यवहार को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है । चीनी सरकार द्वारा हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों पर बर्बरता की वैश्विक आलोचना होती रही है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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