DU Admission Rules Change: दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 2026-27 एकेडमिक ईयर के लिए एडमिशन के नियमों में बदलाव किया है। इस सिलसिले में यूनिवर्सिटी ने अपना नया एडमिशन इन्फॉर्मेशन बुलेटिन जारी किया है। इस साल DU ने नियमों में, खासकर मैनेजमेंट से जुड़े अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए, बड़े बदलाव किए हैं। पहले इन कोर्स में एडमिशन तीन सब्जेक्ट में CUET स्कोर के आधार पर होता था, लेकिन अब स्टूडेंट्स को चार सब्जेक्ट में स्कोर जमा करने होंगे। इस फैसले से DU में मैनेजमेंट कोर्स करने की तैयारी कर रहे हजारों स्टूडेंट्स की स्ट्रेटेजी बदल सकती है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन पूरी तरह से कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के ज़रिए होगा। इस बार बैचलर इन मैनेजमेंट स्टडीज़ (BMS), बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट एनालिसिस (BBA-FIA), और BA ऑनर्स बिजनेस इकोनॉमिक्स (BBE) जैसे पॉपुलर कोर्स के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया बदल दिया गया है।
अब तक इन कोर्स में एडमिशन स्टूडेंट्स के CUET स्कोर के आधार पर एक लैंग्वेज सब्जेक्ट, मैथमेटिक्स और एक जनरल टेस्ट में होता था। हालांकि, अब एक और सब्जेक्ट शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि अब स्टूडेंट्स को कुल चार सब्जेक्ट में उनके CUET स्कोर के आधार पर मेरिट के लिए माना जाएगा: एक लैंग्वेज, मैथमेटिक्स, एक डोमेन सब्जेक्ट और एक जनरल टेस्ट। इसका साफ मतलब है कि अब स्टूडेंट्स के सब्जेक्ट से जुड़े ज्ञान को ज़्यादा अहमियत दी जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक, इंस्टीट्यूट का मानना है कि मैनेजमेंट और बिजनेस से जुड़े कोर्स में एडमिशन के लिए स्टूडेंट्स का डोमेन नॉलेज बहुत जरूरी है। सिर्फ लैंग्वेज और मैथमेटिक्स से स्टूडेंट की तैयारी का पूरी तरह से आकलन नहीं हो पाता। इसलिए, यह आकलन करने के लिए एक और सब्जेक्ट जोड़ा गया है कि स्टूडेंट अपने चुने हुए फील्ड को कितनी अच्छी तरह समझते हैं।
छात्रों के लिए सलाह
डीयू एडमिनिस्ट्रेशन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने के इच्छुक स्टूडेंट्स को एडमिशन बुलेटिन ध्यान से पढ़ने की सलाह दी है। इसमें हर कोर्स के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, जरूरी सब्जेक्ट और CUET के नियम साफ तौर पर बताए गए हैं। स्टूडेंट्स को उसी के हिसाब से CUET फॉर्म भरना चाहिए। DU ने यह भी साफ किया है कि CUET एग्जाम के बाद यूनिवर्सिटी अपना एडमिशन पोर्टल खोलेगी, जहां स्टूडेंट्स रजिस्टर कर सकते हैं।
यह बदलाव स्टूडेंट्स को उनकी पढ़ाई के लिए सही दिशा देगा, सब्जेक्ट चुनना आसान बनाएगा और उनकी तैयारी को बेहतर करेगा। इससे उनकी करियर प्लानिंग मजबूत होगी और उन्हें कॉम्पिटिटिव एग्जाम में अच्छा परफॉर्म करने में मदद मिलेगी।