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विदेशी नेता मास्को में बैठी इंदिरा गांधी को नहीं करते फ़ोन तो हो जाता जॉर्ज फर्नांडिस का एनकाउंटर!

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 29, 2019 12:21 IST

तीन जून 1930 को मंगलौर में जन्मे जॉर्ज का 29 जनवरी 2019 को दिल्ली में निधन हो गया। जॉर्ज फर्नांडिस जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के संयोजक रहे थे।

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वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व रक्षा मंत्री  जॉर्ज फर्नांडिस का मंगलवार को 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। तीन जून 1930 को मैंगलोर में जन्मे जॉर्ज ने राजनीति की शुरुआत ट्रेड यूनियन और स्थानीय नगरपालिका की राजनीति से की। 1967 में महज 37 साल की उम्र में जॉर्ज ने महाराष्ट्र कांग्रेस के धाकड़ नेता एसवाई पाटिल को हराकर लोक सभा में डेब्यू किया। 

मुंबई नगरपालिका के सभासद से देश के रक्षा मंत्री बनने के लम्बे राजनीतिक सफर में एक वक़्त ऐसा भी आया जब जॉर्ज फर्नांडिस की जान पर बन आयी थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा 1975 में लगाये गये आपातकाल में जब जॉर्ज को गिरफ्तार किया गया तो पुलिस की मंशा उन्हें एनकाउंटर में मार गिराने की थी। 

25 जून 1975 की रात को इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल की घोषणा की थी। जॉर्ज फर्नांडिस को अगले दिन पता चला कि इंदिरा सरकार ने देश में इमरजेंसी लगा दी है। विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी की ख़बर लगते ही जॉर्ज भूमिगत हो गये और भेष बदलकर रहने लगे।  

जॉर्ज करीब एक साल तक पुलिस और खुफिया एजेंसियों को चकमा देते रहे। जॉर्ज को आखिरकार 10 जून 1976 को कोलकाता (तब कलकत्ता) के एक चर्च से गिरफ़्तार किया गया। जॉर्ज को बड़ौदा डायनाइमट केस के अभियुक्त के तौर पर गिरफ़्तार किया गया था। उनपर सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश में शामिल होने का आरोप था। 

जॉर्ज की गिरफ़्तारी के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी रूस में थीं। जॉर्ज के करीबी और वरिष्ठ पत्रकार केवी राव ने बीबीसी हिन्दी से बातचीत में बताया था कि "ये लगभग तय था कि जॉर्ज को एनकाउंटर में मार दिया जाएगा।" राव के अनुसार जिस चर्च से जॉर्ज को गिरफ़्तार किया गया था उसके पादरी ने तत्कालीन जर्मनी दूतावास को इसकी ख़बर दे दी और जॉर्ज की गिरफ़्तारी की ख़बर अंतरराष्ट्रीय जगत तक पहुँच गयी।

उस समय जर्मनी के चांसलर विली ब्राण्ड थे और ऑस्ट्रिया के चांसलर ब्रूनो काएस्की थे। ये दोनों नेता सोशलिस्ट इंटरनेशनल के प्रमुख स्तम्भ माने जाते थे। माना जाता है कि इन दोनों नेताओं ने भारत के प्रखर समाजवादी नेता होने के नाते जॉर्ज फर्नांडिस का बचाव किया। 

विदेशी नेताओं ने जॉर्ज के लिए इंदिरा गांधी को किया था फोन!

जॉर्ज फर्नांडिस ने पहला लोक सभा चुनाव 1967 में मुंबई (तब बॉम्बे) साउथ से जीता था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी, नार्वे और ऑस्ट्रिया जैसे देशों ने तत्काल इंदिरा गांधी सरकार को फैक्स भेजकर जॉर्ज फर्नांडिस की हिफाजत की ताकीद की थी। राव के अनुसार इन देशों के नेताओं ने मास्को में इंदिरा गांधी को फ़ोन कर के जॉर्ज को किसी तरह का नुकसान होने पर भारत के साथ कूटनीतिक सम्बन्ध प्रभावित होने की चेतावनी दी थी।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी भारत सरकार को पत्र लिखकर जॉर्ज फर्नांडिस को तत्काल वकील मुहैया कराने और शारीरिक सुरक्षा की गारंटी दिए जाने की माँग की थी। जॉर्ज फर्नांडिस को कोलकाता से गिरफ़्तार कर के पहले बड़ौदा और बाद में दिल्ली के तिहाड़ जेल में रखा गया। 

इमरजेंसी हटने के बाद हुए लोक सभा चुनाव 1977 में जॉर्ज फर्नांडिस बिहार के मुजफ्फरपुर से करीब तीन लाख वोटों से चुनाव जीतकर दोबारा सांसद बने। मोरारजी देसाई सरकार में उन्हें मंत्री भी बनाया गया। जॉर्ज फर्नांडिस 1996, 1998 और 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे। साल 2004 में जॉर्ज मुजफ्फरपुर से चुनाव जीते लेकिन एनडीए सत्ता से बाहर हो गयी। साल 2009 के लोक सभा चुनाव में जॉर्ज को मुजफ्फरपुर से हार का सामना करना पड़ा। उसी दौरान जॉर्ज की सेहत तेजी से बिगड़ी। जॉर्ज अल्जाइमर और डिमेंशिया से पीड़ित बताये गये। धीरे धीरे वो सार्वजनिक जीवन से दूर हो गये। जॉर्ज फर्नांडिस का 29 जनवरी 2019 को दिल्ली में निधन हो गया। 

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