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सफल रहा ममता बनर्जी का ‘दीदी के बोलो’ अभियान, अब साबित हो रहा दोधारी तलवार, जनता पूछ रही है असहज करने वाले सवाल

By भाषा | Updated: August 20, 2019 20:35 IST

ममता बनर्जी नेविशाल जन संपर्क कार्यक्रम शुरू किया था जिसके तहत 1000 से अधिक पार्टी नेता लोगों की समस्याओं को जानने-समझने और उनका निवारण करने के लिए अगले 100 दिनों में 10000 गांवों में जायेंगे। यह कार्यक्रम मुसीबत में फंसे लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जनसंपर्क अभियान ‘दीदी के बोलो’ तृणमूल कांग्रेस के दोधारी तलवार साबित हो रहा है क्योंकि इससे जहां उसे लोगों तक पहुंचने में मदद मिल रही है, वहीं उसे असहज सवाल तथा जबरन वसूली, कट मनी और भ्रष्टाचार के उलाहने भी सुनने पड़ रहे हैं।चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर और उनकी कंपनी ‘इंडियन पॉलिटिकल ऐक्शन कमिटी’ की सलाह पर बनर्जी ने लोगों को पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद के लिए ‘दीदी के बोलो’ अभियान के तहत 29 जुलाई को हेल्पलाइन नंबर 9137091370 और वेबसाइट डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट दीदी के बोलो डॉट कॉम शुरू किया था। तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद प्रशांत किशोर की कंपनी की सेवाएं ली थी। यह डिजिटल प्लेटफार्म लोगों के बीच हिट रहा है क्योंकि इसके शुरू होने के दो दिन के अंदर ही दो लाख से अधिक कॉल आए।बनर्जी ने भी विशाल जन संपर्क कार्यक्रम शुरू किया था जिसके तहत 1000 से अधिक पार्टी नेता लोगों की समस्याओं को जानने-समझने और उनका निवारण करने के लिए अगले 100 दिनों में 10000 गांवों में जायेंगे। यह कार्यक्रम मुसीबत में फंसे लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। खराब स्वास्थ्य के कारण निजी परेशानी में फंसे सैंकड़ों कॉलरों को राज्य के स्वास्थ्य विभाग, तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और मंत्रियों ने तत्काल सहायता प्रदान करायी।तृणमूल कांग्रेस के एक नेता के अनुसार यहां तक कि कर्नाटक और केरल में बाढ़ में फंसे बंगाल के लोगों को भी बचाया गया। हालांकि, इस कार्यक्रम से तृणमूल नेतृत्व पर कुछ अवांछित भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं। एक अन्य पार्टी नेता ने कहा कि जबरन वसूली, कट मनी, सिंडिकेट की भी शिकायतें आयी हैं। शिकायतें मिलने पर हम उन पर गौर करते हैं। इस कार्यक्रम पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल के लोग तृणमूल कांग्रेस के कुशासन और कट मनी से आजिज आ गये हैं।

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