लाइव न्यूज़ :

दिल्ली दंगा : आरोपपत्र पढ़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया, आरोपियों ने अदालत से कहा

By भाषा | Updated: January 19, 2021 20:00 IST

Open in App

नयी दिल्ली, 19 जनवरी उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगा मामलों में गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) के तहत मुकदमे का सामना कर रहे कई आरोपियों ने मंगलवार को एक अदालत के सामने दावा किया कि आदेश के बावजूद जेल में उन्हें आरोपपत्र तक पहुंच नहीं दी गयी।

वहीं, कुछ आरोपियों ने दावा किया कि आरोपपत्र पढ़ने के लिए उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। आरोपियों ने अदालत से जेल प्रशासन को एक घंटे से ज्यादा समय देने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया ताकि वे जेल में कंप्यूटर सिस्टम पर 1800 पन्ने का आरोपपत्र पढ़ पाएं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने मामले को दो फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के दौरान आरोपियों खालिद सैफी, शिफा उर रहमान और शादाब अहमद ने दावा किया कि अदालत के आदेश के तहत जेल के कंप्यूटर पर आरोपपत्र को अपलोड कर दिया गया है लेकिन उन्हें वहां तक पहुंच नहीं दी गयी है।

मंडोली जेल में बंद सैफी ने कहा, ‘‘पुलिस अधिकारियों ने कंप्यूटर में आरोपपत्र अपलोड कर दिया है लेकिन जेल अधिकारियों ने वहां तक पहुंच की इजाजत नहीं दी।’’

तिहाड़ जेल में बंद रहमान ने कहा कि जेल प्रशासन ने अब तक उन्हें सूचित नहीं किया है कि आरोपपत्र अपलोड कर दिया गया है।

आप के निलंबित पार्षद और सह आरोपी ताहिर हुसैन ने दावा किया कि वह आरोपपत्र नहीं पढ़ पाए क्योंकि कंप्यूटर पर हमेशा कोई ना कोई बैठा रहता है। हुसैन ने पेन ड्राइव में इसे मुहैया कराने का अनुरोध किया ताकि वह पुस्तकालय जाकर वहां इसे पढ़ सकें।

आरोपियों को आरोपपत्र पढ़ने के लिए ज्यादा समय नहीं दिया गया, इस तथ्य का पता चलने के बाद अदालत ने नाराजगी प्रकट की।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने कहा कि उन्हें आरोपपत्र पढ़ने के लिए किसी दिन तीन घंटे दिए गए जबकि किसी दिन एक ही घंटा दिया गया।

जेएनयू के छात्र शरजील इमाम ने दावा किया कि आरोपपत्र पढ़ने के लिए उन्हें दो घंटे का ही समय दिया गया। पूर्व पार्षद इशरत जहां ने कहा कि उन्हें एक घंटे दिया गया वहीं जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा ने कहा कि उन्हें आरोपपत्र पढ़ने के लिए केवल डेढ़ घंटे का वक्त दिया गया।

न्यायाधीश ने जब तिहाड़ जेल प्रशासन से आरोपियों द्वारा जतायी गयी चिंता पर सवाल किया तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए।

आरोपियों ने कहा था कि उन्हें अपने वकीलों से आधे घंटे की मुलाकात के दौरान इतना विशालकाय आरोपपत्र पर चर्चा करने में मुश्किलें आती हैं। इसके बाद अदालत ने पुलिस को जेल में कंप्यूटर में आरोपपत्र की एक प्रति अपलोड करने का निर्देश दिया था।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

ज़रा हटकेVIDEO: पूजा करने गया था श्रद्धालु, मंदिर में ही हो गई पिटाई – CCTV फुटेज वायरल

क्रिकेटKKR का खाता खुला, PBKS टॉप पर, मैच रद्द होने से बदला पूरा समीकरण

क्रिकेटKKR vs PBKS: ईडन गार्डन्स में आउटफील्ड गीली होने के कारण मैच रद्द, दोनों टीमों को एक-एक अंक मिला

ज़रा हटकेVIDEO: हाईवे पर खतरनाक टावर गिरा, मौके पर प्रशासन मौजूद

भारतWest Bengal: विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 90 लाख नाम हटाए गए

भारत अधिक खबरें

भारतAssam Opinion Poll 2026: बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए और भी बड़े बहुमत के साथ सत्ता में बना रहेगा, Matrize का अनुमान

भारतयूपी में सरकारी वकीलों की फीस 50% तक बढ़ाएगी सरकार, सरकारी खजाने पर बढ़ेगा 120 करोड़ रुपए का बोझ

भारत'मेरे पति 40 साल के हैं, मैं 19 की': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में महिला ने अपने प्रेमी के साथ रहने का अधिकार जीता

भारत'IIT बाबा' अभय सिंह ने कर्नाटक की इंजीनियर से शादी की, पत्नी के साथ हरियाणा में अपने पैतृक गांव पहुंचे

भारतSamrat Vikramaditya Mahanatya: 60 हजार से ज्यादा दर्शकों ने देखा 'सम्राट विक्रमादित्य', वाराणसी के रोम-रोम में बसा अनोखा मंचन, देखें Photos