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कर्मचारियों, नियोक्ताओं का पीएफ में योगदान कम कर 10 प्रतिशत किया गया, 6,750 करोड़ रुपये का होगा लाभ

By भाषा | Updated: May 14, 2020 05:45 IST

कर्मचारियों को जेबों में अधिक पैसा डालने और नियोक्ताओं को पीएफ (भविष्य निधि) बकाया के भुगतान में राहत देने के लिये यह कदम उठाया गया है। इससे दोनों को कुल 6,750 करोड़ रुपये की नकदी सुलभ होगी।

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ठळक मुद्देवित्त मंत्री सीतारमण ने ईपीएफओ के तहत आने वाले सभी प्रतिष्ठानों में नियोक्ताओं और कर्मचारियों के भविष्य निधि योगदान को तीन माह के लिये सांविधिक योगदान मूल वेतन के 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने की घोषणा की।कर्मचारियों को जेबों में अधिक पैसा डालने और नियोक्ताओं को पीएफ (भविष्य निधि) बकाया के भुगतान में राहत देने के लिये यह कदम उठाया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत आने वाले सभी प्रतिष्ठानों में नियोक्ताओं और कर्मचारियों के भविष्य निधि योगदान को तीन माह के लिये सांविधिक योगदान मूल वेतन के 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने की घोषणा की।

कर्मचारियों को जेबों में अधिक पैसा डालने और नियोक्ताओं को पीएफ (भविष्य निधि) बकाया के भुगतान में राहत देने के लिये यह कदम उठाया गया है। इससे दोनों को कुल 6,750 करोड़ रुपये की नकदी सुलभ होगी।

यह निर्णय ईपीएफओ के दायरे में आने वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होगा। इस निर्णय से ,ऐसे 4.3 करोड़ कर्मचारियों और 6.5 लाख नियोक्ताओं को लाभ होगा जो कोरोना वायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिये जारी लॉकडाउन के कारण नकदी समस्या से जूझ रहे हैं।

इसके अलावा, वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत दी गयी राहत को तीन महीने यानी अगस्त तक के लिये और बढ़ाने की घोषणा की। इसके तहत कारोबारियों और संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि में दिये जाने वाले मूल वेतन का कुल 24 प्रतिशत (12 प्रतिशत कर्मचारियों का और 12 प्रतिशत नियोक्ताओं का) भुगतान सरकार करेगी।

इससे 3.67 लाख नियोक्ताओं और 72.22 लाख कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

सीतारमण के अनुसार इससे संगठित क्षेत्र के 72.22 लाख कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को 2,500 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचेगा।

भविष्य निधि योगदान में कटौती के बारे में उन्होंने कहा कि यह कर्मचारियों की जेबों में पैसा डालने और नियोक्ताओं को राहत देने के लिये उठाया गया कदम है।

हालांकि केंद्रीय लोक उपक्रम और राज्यों के उपक्रम नियोक्ताओं के योगदान के रूप में ईपीएफओ में 12 प्रतिश्त का योगदान करते रहेंगे।

यह योजना उन कर्मचारियों पर लागू होगी जो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 24 प्रतिशत ईपीएफ मदद के दायरे में नहीं आते।

इससे ईपीएफओ के दायरे में आने वाले करीब 6.5 लाख प्रतिष्ठानों और करीब 4.3 करोड़ कर्मचारियों को राहत मिलेगी। इससे तीन महीने तक नियोक्ताओं और कर्मचारियों को खर्च के लिए 6,750 करोड़ रुपये की नकदी सुलभ होगी।

 

 

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