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केंद्र ने सीजेआई के दो प्रस्तावों को नहीं दी मंजूरी, राष्ट्रीय न्यायिक अवसंरचना प्राधिकरण और सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति की रखी थी मांग

By विशाल कुमार | Updated: May 1, 2022 08:37 IST

सीजेआई एनवी रमना ने राष्ट्रीय न्यायिक अवसंरचना प्राधिकरण के गठन और बेंच पर कमी के मुद्दे को हल करने के लिए अस्थायी तौर पर हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों को नियुक्त करने की योजना का प्रस्ताव रखा था।

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ठळक मुद्देअदालतों की ढांचागत जरूरतों के लिए राज्य स्तरीय निकायों की स्थापना पर एक समझौता हुआ। केंद्र ने राज्यों को एकमुश्त अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने पर भी विचार करने पर सहमति व्यक्त की।मतभेदों के कारण लंबी चर्चा हुई जिसके बाद प्रस्ताव वापस ले लिया गया।

नई दिल्ली: शनिवार को मुख्यमंत्रियों और हाईकोर्टों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीजेआई एनवी रमणा ने जिन दो प्रस्तावों को रखा था उन्हें केंद्र सरकार और कुछ भाजपा शासित राज्यों से समर्थन नहीं मिला।

सीजेआई रमना ने राष्ट्रीय न्यायिक अवसंरचना प्राधिकरण के गठन और बेंच पर कमी के मुद्दे को हल करने के लिए अस्थायी तौर पर हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों को नियुक्त करने की योजना का प्रस्ताव रखा था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि इसके बजाय, अदालतों की ढांचागत जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य स्तरीय निकायों की स्थापना पर एक समझौता हुआ। 

केंद्र ने कुछ प्रारंभिक आपत्तियों के बाद राज्यों को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एकमुश्त अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने पर भी विचार करने पर सहमति व्यक्त की।

सूत्रों ने कहा कि सीजेआई रमना ने प्रस्ताव दिया था कि सीजेआई की अध्यक्षता में राष्ट्रीय न्यायिक अवसंरचना विकास प्राधिकरण को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया जाए और राज्यों में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की अध्यक्षता में एक समान तंत्र स्थापित किया जाए। 

केरल और छत्तीसगढ़ जैसे कुछ विपक्षी शासित राज्यों ने बताया कि राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण किए बिना एक प्रणाली स्वीकार की जा सकती है।

हालांकि, केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने यह कहते हुए आपत्ति जताई है कि इस तरह के विशेष तंत्र की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने तर्क दिया था कि केंद्र धन आवंटित कर रहा है और कार्यकारी बुनियादी ढांचे के विकास को लागू करेगा। कुछ भाजपा शासित राज्यों ने भी ऐसा ही रुख अपनाया।

मतभेदों के कारण लंबी चर्चा हुई जिसके बाद प्रस्ताव वापस ले लिया गया। लेकिन राज्य स्तर पर एक तंत्र स्थापित किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे, जो धन के खर्च, कार्यान्वयन और अनुवर्ती कार्रवाई की निगरानी करेंगे।

इसके साथ ही केंद्र ने जजों की कमी के मुद्दे के समाधान के लिए अस्थायी तौर पर सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई जिसके बाद उसे भी वापस ले लिया गया।

सूत्रों ने कहा कि हाईकोर्ट के जजों के 388 पद खाली पड़े हैं। अहमदाबाद हाईकोर्ट में 66 रिक्तियां हैं, उसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में 37, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में 37, कलकत्ता हाईकोर्ट में 33, पटना हाईकोर्ट में 26, दिल्ली हाईकोर्ट में 25 और राजस्थान हाईकोर्ट में 24 रिक्तियां हैं।

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