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नौसेना लीक मामला: CBI ने एक और नौसैन्य अधिकारी के खिलाफ दाखिल किया आरोप-पत्र, दो को मिल चुकी है जमानत

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 24, 2021 12:25 IST

सीबीआई को नौसेना में खरीद को लेकर एक बैठक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के लीक होने की सूचना मिली थी जिसके बाद दो सितंबर को सेनानिवृत्त नौसैन्य अधिकारी कमोडोर रणदीप सिंह और कमांडर सतविंदर जीत सिंह के यहां छापेमारी की गई थी।

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ठळक मुद्देनौसेना के कमांडर जगदीश के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोप-पत्र दाखिल किया हैCBI को नौसेना में खरीद को लेकर एक बैठक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के लीक होने की सूचना मिली थी

नयी दिल्लीः नौसेना के उपकरणों की खरीद तथा उनकी देखरेख से संबंधित गोपनीय सूचना कथित तौर पर लीक करने के मामले में सितंबर में गिरफ्तार किए गए नौसेना के कमांडर जगदीश के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोप-पत्र दाखिल किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। वहीं विशेष न्यायाधीश अनुराधा शुक्ला भारद्वाज ने 18 नवंबर को पारित आदेश में कमांडर (सेवानिवृत्त) एसजे सिंह, कमोडोर (सेवानिवृत्त) रणदीप सिंह और एलन प्रबलित प्लास्टिक लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक टीपी शास्त्री को जमानत दे दी। उन्हें इतनी ही राशि की जमानत राशि के साथ एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी गई है।

अधिकारियों ने बताया कि छह आरोपियों के खिलाफ दो आरोप-पत्र पहले ही दाखिल किए जा चुके थे लेकिन कमांडर जगदीश के खिलाफ जांच चल रही थी। सोमवार को सीबीआई ने उनके खिलाफ भी आरोप-पत्र दाखिल कर दिया। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त अधिकारी कमोडोर रणदीप सिंह और कमांडर एस जे सिंह, सेवारत अधिकारी कमांडर अजीत पांडे और हैदराबाद स्थित एलेन रेनफोर्स्ड प्लास्टिक्स लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक समेत कई आरोपियों को इस मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है। बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि सीबीआई ने यह स्वीकार किया है कि सरकारी गोपनीयता कानून (ओएसए) के तहत जांच चल रही है लेकिन उन्होंने आरोप-पत्र में इसका जिक्र नहीं किया।

वकीलों ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया गया आरोप-पत्र अधूरा है अत: आरोपी स्वत: जमानत पाने का अधिकारी हो जाता है। जांच एजेंसी अगर 60 दिन अथवा 90 दिन की तय अवधि (लगाए गए आरोपों के आधार पर) के भीतर आरोप-पत्र दाखिल नहीं करती है तो आरोपी वैधानिक रूप से जमानत का हकदार हो जाता है। बचाव पक्ष के वकीलों ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए दलील दी थी कि सरकारी गोपनीयता कानून के तहत आरोप-पत्र 90 दिन में नहीं बल्कि 60 दिन के भीतर दायर होना चाहिए। विशेष अदालत ने बचाव पक्ष के वकीलों के दलीलों से सहमत होते हुए कहा कि सरकारी गोपनीयता कानून के संबंध में सीबीआई का आरोप-पत्र अधूरा है। इसके बाद अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी।

सीबीआई को नौसेना में खरीद को लेकर एक बैठक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के लीक होने की सूचना मिली थी जिसके बाद दो सितंबर को सेनानिवृत्त नौसैन्य अधिकारी कमोडोर रणदीप सिंह और कमांडर सतविंदर जीत सिंह के यहां छापेमारी की गई थी। दोनों को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में सीबीआई ने कमांडर अजीत कुमार पांडे, कमांडर जगदीश और एलेन रेनफोर्स्ड प्लास्टिक्स लिमिटेड के अधिकारियों समेत कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। 

टॅग्स :सीबीआईनेवी
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