book review of aisi waisi aurat in hindi written by ankita jain | पुस्तक समीक्षा: आपके दिल को झकझोर देगी 'ऐसी-वैसी औरत'
पुस्तक समीक्षा: आपके दिल को झकझोर देगी 'ऐसी-वैसी औरत'

किताब- ऐसी-वैसी औरत
राइटर- अंकिता जैन
प्रकाशक- हिंदी युग्म
मूल्य- 68 रुपए मात्र
एमेजॉन-फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध

कहते हैं किताब इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। ये ना डिमांड करती हैं और ना ही कम्प्लेन। मगर किताबों के साथ समाज में कुछ ऐसी महिला भी होती हैं जो कभी किसी चीज की डिमांड नहीं करती। सिर्फ अपना फर्ज निभाती हैं। ये ऐसी औरतें होती हैं जिन्हें समाज में बस ऐसी-वैसी औरत कहकर बुलाया जाता है। समाज में रहने वाली ऐसी ही 10 महिलाओं की कहानी बयां करती है अंकिता जैन की किताब 'ऐसी-वैसी औरत'।

खास लगी मालिन भाभी और सत्तरवें साल की उड़ान

अंकिता जैन की इस किताब में महिलाओं के उस तपके को या महिलाओं के इस वर्ग समूह को पन्नों पर उतारा गया है जिनसे हमारी मुलाकात लगभग रोज होती है। मगर जिंदगी की भाग-दौड़ में हम उन्हें कहीं भूल से जाते हैं। वैसे तो अंकिता ने सभी 10 पात्रों के साथ न्याय किया है मगर मेरी पसंदीदा कैरेक्टर में मालिन भाभी और सत्तर साल की वो महिला आती है जो हवाई जहाज में सफर कर अपने सपनों की उड़ान भरती है। 

मालिन भाभी की जिंदगी की कहानी से परिचय कराएं तो अकेली रहने वाली ये औरत आपको खुद में कहीं ना कहीं जरूर मिल जाएगी। उसका झूले पर बैठकर किताब पढ़ना हो या अपने दिल की सुनते हुए वकील बाबू से ब्याह रचाना। उसकी जिंदगी की कहानी पढ़ने के बाद आपके अंदर का सामाजिक वैल्यू यही कहेगा कि नहीं भाभी ने गलत किया मगर दिल ये जरूर बोलेगा कि इंसान को हमेशा अपनी दिल की सुननी चाहिए। वहीं सत्तर साल की उस औरत की कहानी भी आपका दिल जरूर छू जाएगी। इसके अलावा भी दूसरे पात्र जैसे छोड़ी हुई औरत, एक रात की बात, उसकी वापसी का दिन और भंवर जैसी कहानियां आपको अंदर से हिला जरूर देंगी।  

कमाल का है लेखन

बात करें अंकिता जैन की लेखनी की तो वो लाजवाब है। ये अंकिता की लेखनी ही है जो आपको सारे कैरेक्टर्स और उनसे जुड़ी कहानी को इमैजिन करने पर मजबूर कर देगा। अंकिता की लिखी सत्तरवें साल की उड़ान की ये लाइनें 'आधी रात के अंधेरे में जिंदगी जब काली हो जाती है न बेटा, तब वो झूठ चिल्लाता है, खुद को सच और सफेद बनाने के लिए लेकिन तब कुछ हो नहीं पाता, कुछ भी नहीं, तब सिर्फ एक परछाईं ही होती है गले लगाने...और मैंने अपनी परछाई को भी अलविदा कहने का मन बना लिया। अब सिर्फ अपने अस्तित्व के साथ जिऊंगी, किसी के भरोसे नहीं'। ऐसी ही ना जाने कितनी ही लाइनें आपको समाज की सच्चाई से रूबरू करवाती हैं। 

सिर्फ एक सवाल सिर्फ औरत ही क्यों

इसमें कोई शक नहीं है कि अंकिता की ये किताब हर किसी को पढ़ना चाहिए। फिर चाहे वो पुरुष हो या महिला। मगर मेरा सिर्फ एक सवाल यही है कि हर बार औरत को ही इस कटघरे के घेरे में क्यों खड़ा किया जाता है। हर बार सिर्फ औरतों पर ही लिखकर लेखक पब्लिसिटी क्यों चाहता है। देश में औरतें जितनी सशक्त हैं उतनी मजबूत भी। मुझे ऐसा लगता है कि औरतों को इस बेचारी परिस्थिती से निकालकर उन्हें पावरफुल अंदाज में भी दिखाना चाहिए। सिर्फ यही नहीं औरतों के अलावा पुरुषों और होमोसेक्सुअल लोगों की जिंदगी पर भी फिक्शन कहानियां पढ़ना लोग पसंद करेंगे। 

क्यों पढ़े ऐसी-वैसी औरत

अक्सर ऑफिस से लौटकर आप भी घर के लिए सब्जी खरीदने जाते होंगे। सुबह जब जल्दी में घर के पास वाली औरत के पास शर्ट प्रेस करने को देते होंगे। जिंदगी में आपसे जुड़ी ऐसी ही औरतों की कहानी को करीब से समझने के लिए आपको अंकिता की ये किताब जरूर पढ़नी चाहिए। अंकिता की ये पहली हिंदी किताब है। इससे पहले अंग्रेजी में ‘The Last Karma’ लिख चुकी हैं। जो 2015 में प्रकाशित हो चुकी है। 


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