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बिहारः बच्चों के लिए जानलेवा बनी एक्यूट इंसेफेलाइटिस, एक बच्चे की मौत और कई गंभीर रूप में अस्पताल में भर्ती 

By एस पी सिन्हा | Updated: May 18, 2019 05:43 IST

हर साल तापमान बढ़ने के साथ ही मुजफ्फरपुर सहित आस-पास के जिलों में बच्चों की बीमारी एईएस यानि एक्यूट इन्सेफेलाइटिस ने दस्तक देनी शुरू कर देती है. उसी कड़ी में इसबार भी एईएस ने दस्तक दे दी है.

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बिहार में एकबार फिर से एईएस यानि एक्यूट इन्सेफेलाइटिस ने दस्तक दे दी है. इससे एक बच्चे की मौत भी हो गई है, जबकि 4 बच्चों को गंभीर स्थिती में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इनमें एईएस की पुष्टि हो चुकी है. दरअसल, हर साल तापमान बढ़ने के साथ ही मुजफ्फरपुर सहित आस-पास के जिलों में बच्चों की बीमारी एईएस यानि एक्यूट इन्सेफेलाइटिस ने दस्तक देनी शुरू कर देती है. उसी कड़ी में इसबार भी एईएस ने दस्तक दे दी है.

बताया जाता है कि उमस भरी गर्मी बढ़ते ही चमकी और बुखार से पीड़ित बच्चे बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग बीमारी से बचाव के लिए अलर्ट पर है और बच्चों को धूप से बचाने और खान-पान ठीक तरीके से देने की अपील की जा रही है. 

सरकारी आकंड़ों के अनुसार, इस साल एईएस से एक बच्चे की मौत हो चुकी है. शिवहर के तरियानी के बच्चे की मौत एईएस से एसकेएमसीएच (श्रीकृष्‍ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) में इलाज के दौरान हुई है. जबकि एसकेएमसीएच में एईएस से मिलते-जुलते लक्षणों वाले दो और बच्चों की मौत हुई है. हलांकि, इसकी पुष्टि पटना के एमआरआई से रिपोर्ट आने के बाद होगी. 

इस साल मुजफ्फरपुर समेत आस-पास के जिलों से एसकेएमसीएच में इलाज के लिए भर्ती होने वाले 4 बच्चों में एईएस की पुष्टि हो चुकी है. तापमान में बढ़ोतरी और शरीर से पसीना निकलने वाली ऊमस भरी गर्मी शुरू होने पर एईएस के मामले बढ़ने की आशंका है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिहार में स्वास्थ्य विभाग ने पीएचसी समेत एसकेएमसीच के चिकित्सकों को बीमारी से निपटने के लिए अलर्ट कर दिया है. 24 बेड वाले आईसीयू और पीआईसीयू को एईएस के लिए एसकेएमसीएच में विशेष रूप से तैयार कर लिया गया है. इंटर्न कर रहे डॉक्‍टरों और नर्स को प्रशिक्षण देकर तैयार रखा गया है. 

वहीं, एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ सुनील शाही के अनुसार इस साल जनवरी माह में पहला केस आ गया था. 15 मई तक कुल 5 बच्चे एईएस से मिलते-जुलते लक्षण वाले मिले, जिसमें से एक में जेई की पुष्टि हुई. यहां उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर में एईएस ने साल 1995 में महामारी के रूम में दस्तक दिया था. 

पिछले 8 सालों में ही 1134 बच्चे बीमारी के शिकार हुए, जिनमें से 344 बच्चों की मौत हो गई. कई बच्चे विकलांगता के शिकार हो गए. वर्ष 2010, 2012 और 2015 में बच्चों की मौत का सिलसिला बढ़ता चला गया. साल 2010 से पहले सरकारी आकंडे तैयार नहीं किए जाते थे. लेकिन उसके बाद से हरेक साल बच्चों की मौत का आंकडा स्वास्थ्य विभाग में दर्ज होता रहा है. 

बिहार के मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और वैशाली जिले से सबसे अधिक मामले एईएस के आते रहे हैं. लेकिन इस बिमारी के इलाज का अबतक कोई खास कारण का पता नही लगाया जा सका है. इसमें कई तरह के रिपोर्ट आ चुके हैं. कोई इसे लीची खाने के कारण बताता है तो कोई अन्य कई कारण. लेकिन सही कारण क्या है, इसपर अभी मंथन का दौर जारी है.

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