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Bihar News: आईएएस संजीव हंस के बाद निर्माण कंपनी एसपी सिंगला ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी, ईडी रडार पर अधिकारी, कंपनी और नेता...

By एस पी सिन्हा | Updated: July 19, 2024 17:17 IST

Bihar News: संजीव हंस ने बिहार राज्य पुल निर्माण निगम में मैनेजिंग डायरेक्ट यानी एमडी के पद पर रहने के दौरान इस कंपनी से अवैध लेनदेन किया था।

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ठळक मुद्देईडी की छापेमारी से हड़कंप मच गया है। कंपनी के रीजनल ऑफिस सहित प्रोजेक्ट ऑफिस पर की गई। बोरिंग रोड, गंगा प्रोजेक्ट ऑफिस में ईडी की टीम दस्तावेजों को खंगाल रही है।

Bihar News: ईडी के द्वारा आईएएस अधिकारी व ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव संजीव हंस और पूर्व विधायक गुलाब यादव के ठिकानों पर की गई छापेमारी का मामला अभी ठंडा भी नही पड़ा था कि अब विवादों में रही निर्माण कंपनी एसपी सिंगला ग्रुप के विभिन्न ठिकानों पर भी शुक्रवार को ईडी ने छापेमारी की। ईडी के द्वारा यह छापेमारी सिंगला कंपनी के पटना, दिल्ली और पंचकूला समेत कई अन्य जगहों पर हुई है। आरोपों के अनुसार आईएएस अधिकारी संजीव हंस ने बिहार राज्य पुल निर्माण निगम में मैनेजिंग डायरेक्ट यानी एमडी के पद पर रहने के दौरान इस कंपनी से अवैध लेनदेन किया था।

ईडी की छापेमारी से हड़कंप मच गया है। सूत्रों ने बताया कि ये छापेमारी कंपनी के रीजनल ऑफिस सहित प्रोजेक्ट ऑफिस पर की गई। पटना के बोरिंग रोड, गंगा प्रोजेक्ट ऑफिस में ईडी की टीम दस्तावेजों को खंगाल रही है। ईडी की टीम ठिकानों पर दस्तावेजों की खोज और पड़ताल कर रही है।

सूत्रों के अनुसार संजीव हंस पुल निर्माण निगम के एमडी के पद पर रहने के दौरान एसपी सिंगला ग्रुप से अवैध लेनदेन के आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान संजीव हंस के घर से आय से अधिक संपत्ति से जुड़े दस्तावेज ईडी के हाथ लगे हैं। इस बीच मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही ईडी के रडार पर संजीव हंस के करीबी भी आ गए हैं।

ईडी की टीम ने संजीव हंस के करीबी रालोजपा के कोषाध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा को पूछताछ के लिए पटना स्थित क्षेत्रीय कार्यालय बुलाया था, जहां उनसे पूछताछ की गई। सूत्रों के अनुसार सुनील कुमार सिन्हा आईएएस अधिकारी संजीव हंस के पार्टनर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एसपी सिंगला कंपनी को बिहार में कई बड़े प्रोजेक्ट मिले हैं, जिनमें से भागलपुर के सुल्तानगंज और खगड़िया के अगवानी अप्रोच पुल का काम भी इसी कंपनी को दिया गया था। यह पुल हवा के हल्के से झोंके से ढह गया था।

इस पुल का निर्माण 600 करोड़ रुपए से शुरू हुआ था, जो दो साल बाद 1800 करोड़ पहुंच गया था। इसके बाद फिर इसे 2300 करोड़ रुपये करने की कोशिश की जा रही थी। इसके अलावा सिंगला कंपनी की ओर से बनाया जा रहा एक और पुल सुपौल में भी गिर गया था। दोनों ही पुल निर्माणाधीन थे दोनों में घटिया सामग्री से निर्माण के आरोप लगाए गए।

सुपौल में निर्माणाधीन की लागत 1200 करोड़ रुपए थी। कहा जाता है कि इसमें बड़े अधिकारियों की मिलीभगत रही है और बिहार में घटिया पुलों निर्माण की लागत और समय सीमा दोनों बढ़ती चली जा रही है। वहीं, घटिया सामग्री की वजह से निर्माण के दौरान ही ध्वस्त हो रहे।

टॅग्स :बिहारप्रवर्तन निदेशालयपटनानीतीश कुमार
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