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ईमानदार मंत्री को लालू यादव ने चारा घोटाला मामले में फंसा दिया था, जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने राजद प्रमुख को लेकर किया नया खुलासा

By एस पी सिन्हा | Updated: October 6, 2021 17:09 IST

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि लालू प्रसाद ने भोलाराम तूफानी से हेलीकाप्टर में पशुपालन घोटाला के फर्जी दस्तावेजों पर दस्तखत करा लिया था.

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ठळक मुद्देचुनाव के ठीक पहले लालू यादव का साथ छोड़कर एनडीए में आए थे.लालू यादव ने कहा था कि हमारे शासन काल में ही मुसहरों का सूर्योदय हुआ.जदयू ने राजद प्रमुख पर पलटवार किया है.

पटनाः बिहार विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासत की सरगर्मी बढ़ गई है. जदयू अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादाव को लेकर नया खुलासा किया है.

 

उन्होंने आज यहां कहा कि अपने कैबिनेट के पशुपालन मंत्री भोलाराम तूफानी से लालू प्रसाद ने फर्जी दस्तावेजों पर दस्तखत कराया था. बाद में पशुपालन घोटाला में तूफानी का भी नाम आया. वे जेल गए और सदमा की वजह से उनका निधन भी हो गया. ललन ने यह प्रतिक्रिया लालू प्रसाद के कल के उस दावे पर जाहिर की है, जिसमें उन्होंने(लालू) कहा था कि उनके शासनकाल में दलितों की बहुत तरक्की हुई थी.

लालू ने कहा था कि हमारे शासन काल में ही मुसहरों का सूर्योदय हुआ. राजद के प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए मंगलवार को लालू प्रसाद यादव ने भोलाराम तूफानी की कहानी सुनाई थी. कभी उनके(लालू) कैबिनेट में पशुपालन मंत्री रहे भोलाराम तूफानी की चर्चा करते हुए लालू ने कहा था कि जब पहली बार वह भोलाराम तूफानी को लेकर हेलीकॉप्टर पर घूमे तो उसके बाद पूर्व मंत्री ने उनसे क्या कुछ कहा था. लालू ने इस वाकये का जिक्र किया तो राजद के प्रशिक्षण शिविर में मौजूद नेता अपनी हंसी रोक के बगैर नहीं रह पाए थे.

इसके बाद अब जदयू ने राजद प्रमुख पर पलटवार किया है. ललन सिंह ने कहा कि भोलाराम तूफानी बेहद सज्जन व्यक्ति थे. एक ईमानदार मंत्री को लालू यादव ने चारा घोटाला के मामले में फंसा दिया. उन्होंने कहा कि भोलाराम तूफानी को हेलीकॉप्टर पर घुमाने की कहानी तो लालू यादव ने बता दी.

लेकिन यह नहीं बताया कि कैसे उन्होंने हेलीकॉप्टर पर घुमाने के बाद तूफानी से चारा घोटाले की फाइल पर हस्ताक्षर करवा लिए थे. कैसे घोटालों की फाइल भोलाराम तूफानी के सामने आती गई और लालू यादव अपनी मर्जी के मुताबिक भोलाराम तूफानी से साइन करवाते रहें.

ललन सिंह ने भोलाराम तूफानी को लेकर लालू यादव के कारनामे को खूब याद किया है. उन्होंने कहा कि लालू यादव ने राजनीति में भ्रष्टाचार का जो खेल खेला, उसके बाद अब वह उसी तरह की ट्रेनिंग अपने बेटे तेजस्वी यादव को दे रहे हैं. ललन सिंह ने कहा कि प्रवासी नेता को लालू यादव इस बात की ट्रेनिंग दे रहे हैं कि आखिर कैसे लोगों को बेवकूफ बनाया जाता है.

लालू यादव ने दलित उत्थान का दिखावा तो किया लेकिन दलितों को घोटाले के मामले में फंसाने का भी काम किया. उन्होंने ट्वीट के जरिए कहा कि लालू प्रसाद आज महादलित समाज का मजाक उडा रहे हैं. फिर से पूरे बिहार की इज्जत उतार रहे हैं. राज्य के लोग इन्हें बर्दाश्त नहीं कर रहे हैं. इनके कुनबा को सत्ता से बेदखल कर दिया है.

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि लालू प्रसाद ने भोलाराम तूफानी से हेलीकाप्टर में पशुपालन घोटाला के फर्जी दस्तावेजों पर दस्तखत करा लिया था. इसके जरिए उन्होंने खजाना लूट लिया. देश-विदेश में अकूत संपत्ति जमा की. इसके बाद ललन सिंह ने ट्वीट कर लिखा कि, “विकास की सीढ़ियों पर अंतिम पंक्ति में खड़ा महादलित समाज का अंतिम तबका को बिहार में अलग से कानूनी आरक्षण, सामाजिक-राजनीतिक प्रतिनिधित्व व अनेकों विकासोन्मुखी योजनाओं के तहत मुख्य धारा में लाने का कार्य देशभर में पहले मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने ही किया है. 

इधर, इसी मसले पर राज्‍य के पूर्व मुख्‍यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि लालू यादव उपचुनाव से पहले ही उनसे डर गए हैं. यही बात है कि वे मुसहर समुदाय और महादलित के बारे में भरमाने वाले बयाने देने लगे हैं. उन्‍होंने दावा किया कि एक वक्‍त लालू मुसहर का मजाक उड़ाते थे और कहते थे कि ये लोग कुर्सी पर बैठने लायक नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि, लालू प्रसाद यादव जी जब आप बिहार के अघोषित मुख्यमंत्री थे तब मैंने माउंटेनमैन दशरथ मांझी जी को सम्मान दिलाने के लिए कई बार आपसे अनुरोध किया और आपका जवाब था-“मुसहर कुर्सी पर बईठे ला हो मांझी जी” खैर आज जीतन के डर से ही सही पर अब आपने मुसहर को सम्मान देना तो शुरू किया. ये डर अच्छा है.

वहीं, वीआईपी अध्यक्ष व राज्य के पशुपालन मंत्री मुकेश सहनी यह कहना नहीं भूल रहे कि किस तरह उनको महागठबंधन में अपमानित किया गया. साथ ही कैसे लालू यादव जेल से उन्हें फोन करते रहे यह ऑफर देते रहे कि आप पाला बदल दीजिए. यहां बता दें कि, जीतन राम मांझी हो या मुकेश सहनी दोनों बीते चुनाव के ठीक पहले लालू का साथ छोड़कर एनडीए में आए थे.

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