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मोदी सरकार का बड़ा कदम: एक दिन में 11 आयकर आयुक्तों सहित 12 भ्रष्ट अधिकारियों की छुट्टी

By हरीश गुप्ता | Updated: June 11, 2019 07:38 IST

11 आयुक्तों के अलावा एक अन्य अधिकारी को भी सेवानिवृत्त कर दिया गया है. वह आईआरएस कैडर का अधिकारी नहीं है और फिलहाल टीआरओ कानपुर के पद पर पदस्थ था.

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ठळक मुद्दे मुंबई के आयकर आयुक्त रह चुके अजोय कुमार सिंह भी 2007 से सीबीआई जांच का सामना कर रहे थे. चंदर सिंह सैनी को 30 लाख की रिश्वत के मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था.

आजादी के बाद भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ संभवतया सबसे बड़ी कार्रवाई में नरेंद्र मोदी सरकार ने आयकर विभाग के मुख्य आयुक्त स्तर तक के 11 भ्रष्ट अधिकारियों की छुट्टी कर दी है. हर न्यायिक राहत का दरवाजा खटखटा चुके अधिकारियों को सरकार ने नियम 56 जे के तहत प्राप्त विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करके अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया. इनमें से कुछ अफसरों पर रिश्वत, जबरन वसूली, बदनीयती से फैसले तो एक पर दो महिला अफसरों का यौन शोषण करने के गंभीर आरोप लगे थे. 

11 आयुक्तों के अलावा एक अन्य अधिकारी को भी सेवानिवृत्त कर दिया गया है. वह आईआरएस कैडर का अधिकारी नहीं है और फिलहाल टीआरओ कानपुर के पद पर पदस्थ था. जिन अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है, उनमें चर्चित अधिकारी अशोक अग्रवाल (आईआरएस 1985 बैच) भी हैं जो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में थे और भ्रष्टाचार के कई मामलों में लिप्त पाए गए हैं.

आयुक्त रैंक की दो महिला अधिकारियों के यौन उत्पीड़न का आरोप झेल रहे आयुक्त (अपील) नोयडा एस.के. श्रीवास्तव (आईआरएस 1989) को भी वक्त से पहले विदा होना पड़ा है. होमी राजवंश (आईआरएस 1985) ने अपने और परिजनों के नाम 3.17 करोड़ से ज्यादा की चल-अचल संपत्ति जमा कर ली थी. रिश्वतखोरी के आरोप में बी.बी. राजेंद्र प्रसाद को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. वह भी 2 मई 2017 से निलंबित ही चल रहे थे.

 मुंबई के आयकर आयुक्त रह चुके अजोय कुमार सिंह भी 2007 से सीबीआई जांच का सामना कर रहे थे. सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद वह 2009 से निलंबित थे. आयकर आयुक्त बी. अरूलप्पा पर महत्वपूर्ण और बड़ी कर चोरी के मामले काबिल अधिकारियों को न देने का आरोप था. उनके कारण कर वसूली में 16.69 करोड़ के नुकसान का अनुमान है. जबरन सेवानिवृत्त अधिकारियों में शामिल आलोक कुमार मित्रा भी भ्रष्टाचार और फिरौती के कई मामलों में लिप्त थे. कर आकलन के उनके दुर्भावनापूर्ण फैसलों में से कई अपील के बाद उलट दिए गए थे. 

चंदर सिंह सैनी को 30 लाख की रिश्वत के मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. उन पर अपने और पत्नी के नाम पर 1.63 करोड़ रु. की परिसंपत्ति जमा करने का आरोप है. अंदासु रविंदर को सीबीआई ने पांच लाख रु. की रकम के साथ गिरफ्तार किया था. वह इस रकम का स्रोत नहीं बता पाए थे. विवेक बत्रा भी 2005 से ही आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई की जांच के घेरे में थे. श्वेताभ सुमन को सीबीआई ने एक कारोबारी को कर राहत देने के लिए 50 लाख की मांग करने पर गिरफ्तार किया था.

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