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बेटी नमिता ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दी पिता अटल बिहारी वाजपेयी की चिता को मुखाग्नि

By रामदीप मिश्रा | Updated: August 17, 2018 17:06 IST

अटल जी की अंतिम यात्री में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसे संभालने के लिए सुरक्षाकर्मियों को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। बीजेपी दफ्तर से लेकर विजय घाट तक लोगों का हुजूम नजर आ रहा था।

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नई दिल्ली, 17 अगस्तः पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया गया। उनका पार्थिव शरीर दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय से विजयघाट स्थित स्मृति स्‍थल लागा गया, जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनकी चिता को दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने मुखाग्नि दी। वहीं, आपको बता दें दिल्ली के कृष्णा मेनन मार्ग स्थित आवास से सुबह उनके पार्थिव शरीर को बीजेपी मुख्यालय लाया गया था। 

इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। उसके बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, मध्य प्रदेश सीएम शिवराज सिंह चौहान, महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। 

अटल जी की अंतिम यात्री में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसे संभालने के लिए सुरक्षाकर्मियों को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। बीजेपी दफ्तर से लेकर विजय घाट तक लोगों का हुजूम नजर आ रहा था। हर कोई अपने चहेते नेता के दीदार करना चाहता था। इस दौरान सभी नेता पैदल चल रहे थे। अंतिम यात्रा के मद्देनजर 25 सड़कें रोकी गई थीं और 20 हजार सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी।   

वहीं, अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार में बांग्लादेश के विदेश मंत्री महमूद अली, नेपाल के विदेश मामलों के मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली, भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक, ब्रिटिश हाई कमिश्नर, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और श्रीलंका के विदेश मंत्री लक्ष्मण किरिला शामिल हुए।

आपको बता दें, 16 अगस्त को अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया था। उन्होंने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान (एम्स) में जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था। अटल बिहारी वाजपेयी को गुर्दा (किडनी) नली में संक्रमण, छाती में जकड़न, मूत्रनली में संक्रमण आदि के बाद 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। 

मधुमेह के शिकार 93 वर्षीय भाजपा नेता का एक ही गुर्दा काम करता था। अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ। अपनी प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और लोकप्रियता के कारण वे चार दशकों से भी अधिक समय से भारतीय संसद के सांसद रहे। इसके अलावा तीन बार भारत के प्रधानमंत्री पद पर भी सुशोभित हुए। 

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