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भारत बंद हिंसा में दलितों की झूठी गिरफ्तारी, देश में इमरजेंसी से भी खतरनाक हालात: मायावती

By कोमल बड़ोदेकर | Updated: April 8, 2018 13:12 IST

मायावती ने कहा, चाहे केंद्र की मोदी सरकार हो या बेजेपी शासित राज्यों की सरकार हो, सभी जगह दलितों पर अत्याचार हो रहा है।

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लखनऊ, 8 अप्रैल। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 2 अप्रैल को हुए दलित आंदोलन-भारत बंद के दौरान हुई हिंसा का जिक्र करते हुए केंद्र की मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में दलितों के लिए इमरजेंसी जैसे हालात हैं। बीजेपी दलितों पर अत्याचार कर रही है। 

मायावती ने कहा, चाहे केंद्र की मोदी सरकार हो या बेजेपी शासित राज्यों की सरकार हो, सभी जगह दलितों पर अत्याचार हो रहा है। भारत बंद के दौरान हुई हिंसा में दलितों पर झूठे केस लगाकर उन्हें जबरन जेल में बंद किया जा रहा है। उन पर गलत तरीके से धाराएं लगाई जा रही है। मायावती ने कहा कि मैं दलितों से कहना चाहती हूं कि वें न्याय के लिए कोर्ट जाएं।    

वहीं बीजेपी सांसद और दलित नेता उदित राज ने भी दलितों के ऊपर हो रहे अत्याचारों को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ बगावती सुर तेज कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि भारत बंद के दौरान हिंसा में मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में बेकसूर दलितों को झूठे केस में आरोपी बनाकर जबरन जेल में बद किया जा रहा है। 

बता दें कि भारत बंद के दौरान भिंड में हिसा भड़काने के आरोपी बीजेपी नेता गिरिराज जाटव को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया था। गिरिराज हिंसा के बाद से फरार चल रहे थे, जिसके चलते पुलिस ने गिरिराज के बारे में सूचना देने वाले को 10 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा भी की थी।

गौरतलब है कि एसस/एसटी ऐक्ट में किए गए सुप्रीम कोर्ट से बदलाव के विरोध में दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया था। जिसमें कई राज्यों में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। कई जगहों पर तोड़फोड़, आगजनी और मारपीट की घटनाएं सामने आई थी।

 गौरतलब है कि 20 मार्च को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की ओर दाखिल की गई रिव्यू पिटिशन पर सर्वोच्च न्यायालय की खुली अदालत में सुनवाई की थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह 20 मार्च को अपने दिए फैसले पर कायम है और उसने अपने फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा है कि वह नहीं चाहता कि किसी बेगुनाह को सजा मिले। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पार्टियों से इस मामले में 2 दिनों के भीतर विस्तार से अपनी बात रखने के लिए कहा था। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होने की उम्मीद है।  

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