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चंपत राय बोले-तीन साल में बनेगा राम मंदिर, कोई ड्रेस कोड लागू नहीं, करीब 50 हजार श्रद्धालु रोजाना करेंगे दर्शन

By बृजेश परमार | Updated: March 21, 2021 20:37 IST

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने ट्रस्ट की गतिविधियों, सुरक्षाकर्मियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए राम जन्मभूमि परिसर से करीब दो-तीन किलोमीटर दूर तकरीबन 1.15 लाख वर्ग फुट जमीन खरीदी है।

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ठळक मुद्देपिछले हफ्ते राम कोट और थेरी बाजार इलाकों में स्थित दो प्लॉट खरीदे गए।690 रुपये प्रति वर्ग फुट के दाम से जमीन खरीदी गई। दोनों प्लॉट के मालिक को आठ करोड़ रुपये दे दिए हैं।

उज्जैनः अयोध्या में राम जन्म भूमि पर मंदिर की तैयारी बहुत अच्छी चल रही है। 3 साल में मंदिर बन कर तैयार हो जाएगा।

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं श्री राम मंदिर ट्रस्टी चंपत राय ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में कोई ड्रेस कोड लागू नहीं होगा। महाकाल मंदिर में कौन सा ड्रेस कोड है। उनका दावा था कि मंदिर निर्माण के लिए हम किसी से चंदा नहीं ले रहे है।

ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देर रात यहां पंहुचे विहिप नेता ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। माधव सेवा न्यास के भारत माता मंदिर में मीडिया से चर्चा में कहा कि कई पीढ़ियां गुजर जाएगी और कोई नहीं कह सकेगा कि सरकार का हस्तक्षेप रहा मंदिर में। ये पूरा मंदिर पत्थरों का होगा, जिसमे बुजुर्गों के लिए रेम्प और लिफ्ट भी लगाई जाएगी। भव्य मंदिर में करीब 50 हजार श्रद्धालु रोजाना दर्शन करने अयोध्या आएंगे।

राम मंदिर न्यास ने अयोध्या में 1.15 लाख वर्ग फुट जमीन खरीदी

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने ट्रस्ट की गतिविधियों, सुरक्षाकर्मियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए राम जन्मभूमि परिसर से करीब दो-तीन किलोमीटर दूर तकरीबन 1.15 लाख वर्ग फुट जमीन खरीदी है। न्यासी अनिल मिश्रा ने बताया कि बस्ती जिले के निवासी हरीश कुमार पाठक से पिछले हफ्ते राम कोट और थेरी बाजार इलाकों में स्थित दो प्लॉट खरीदे गए।

उन्होंने बताया कि 690 रुपये प्रति वर्ग फुट के दाम से जमीन खरीदी गई। मिश्रा ने कहा, ‘‘हमने दोनों प्लॉट के मालिक को आठ करोड़ रुपये दे दिए हैं।’’ मंदिर भूमि के विस्तार के लिए राम जन्मभूमि परिसरों से जुड़ी संपत्तियों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है और उनके मालिकों का पता लगाने के लिए एक सूची बनाई जा रही है। इन संपत्तियों में कुछ मुसलमानों के घर और मस्जिद भी हैं।

अयोध्या के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने बताया कि इन संपत्तियों के मालिकों का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि जो लोग यहां रह रहे हैं वे किरायेदार हैं या मकान के मालिक हैं।’’ न्यास के सचिव चंपत राय ने बताया कि राम जन्मभूमि परिसर का विस्तार आपसी सहमति और बातचीत से किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हम उसी कीमत पर जमीन खरीदेंगे जो उसके मालिक मांगेंगे या हम उन्हें उसकी जगह कोई वैकल्पिक जमीन दे सकते हैं।’’ उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं को मौलिक सुविधाएं मुहैया कराने के लिए विस्तार किया जा रहा है। मार्च के पहले सप्ताह में न्यास ने यहां राम जन्मभूमि परिसरों से जुड़ी 7,285 वर्ग फुट जमीन खरीदी। उसकी योजना मंदिर परिसर क्षेत्र का विस्तार 107 एकड़ तक करने का है। 

श्रीलंका स्थित सीता एलिया के पत्थर का अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में किया जाएगा इस्तेमाल

श्रीलंका में भारत के उच्चायोग ने बताया कि श्रीलंका स्थित सीता एलिया के पत्थर का अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा और यह भारत एवं श्रीलंका के संबंधों की मजबूती का स्तम्भ बनेगा। ऐसा माना जाता है कि माता सीता को रावण ने श्रीलंका में इसी स्थान पर बंदी बनाकर रखा था।

उम्मीद की जा रही है कि भारत में श्रीलंका के उच्चायुक्त मिलिंडा मोरागोडा इस पत्थर को भारत लाएंगे। श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने ट्वीट किया, ‘‘अयोध्या में राम मंदिर के लिए श्रीलंका स्थित सीता एलिया के पत्थर का इस्तेमाल भारत और श्रीलंका के संबंधों की मजबूती का स्तम्भ बनेगा। भारत में श्रीलंका के मनोनीत उच्चायुक्त मिलिंदा मोरागोडा को उच्चायुक्त की मौजूदगी में म्यूरपति अम्मान मंदिर में यह पत्थर सौंपा गया।’’

सीता एलिया में माता सीता का एक मंदिर है और ऐसा माना जाता है कि इसी स्थान पर लंकापति रावण ने उन्हें बंदी बनाकर रखा था और यहीं माता सीता भगवान राम से प्रार्थना किया करती थीं कि वह उन्हें बचा कर ले जाएं। श्रीलंका स्थित हकगला गार्डन के रास्ते में पड़ने वाले इस मंदिर को सीता अम्मन मंदिर के रूप में जाना जाता है।

एक नदी के पार एक पहाड़ की चोटी पर गोल चिह्न हैं और माना जाता है कि ये रावण के हाथी के पदचिह्न हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल अयोध्या में राम मंदिर का ‘‘भूमि पूजन’’ किया था। इसी के साथ भाजपा की वह ‘‘मंदिर मुहिम’’ पूरी हो गई, जो तीन दशक तक उसकी राजनीति का अहम हिस्सा रही और जिसने उसे सत्ता में शीर्ष पर पहुंचाया। 

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