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सेना ने आर्टिकल 370 के प्रावधान समाप्त होने के बाद जम्मू कश्मीर में जनता के अनुकूल गतिविधियां तेज कीं

By भाषा | Updated: December 29, 2019 20:47 IST

लेफ्टिनेंट कर्नल आनंद ने कहा कि सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के नेतृत्व में शीर्ष सैन्य कमांडरों ने केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख के सभी सेक्टरों में कई बार अग्रिम चौकियों का दौरा किया है और सैनिकों की संचालन तैयारियों की समीक्षा की। सेना के पीआरओ ने कहा कि अगस्त में ‘मिशन रीच आउट’ शुरू होने के बाद सेना ने पूरे जम्मू कश्मीर में नागरिक कार्यक्रमों को तेज किया।

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ठळक मुद्देसेना के पीआरओ ने कहा कि अगस्त में "मिशन रीच आउट" की शुरुआत के साथ, सेना ने जम्मू-कश्मीर में अपने नागरिक कार्यक्रमों को तेज किया।लेफ्टिनेंट कर्नल आनंद ने कहा कि सेना 43 सद्भावना पब्लिक स्कूल चला रही है, जहां 15,000 छात्र नामांकित हैं, साथ ही तीन विशेष प्रशिक्षण-सह-कोचिंग केंद्र भी संचालित हो रहे हैं।

केंद्र द्वारा लगभग पांच महीने पहले जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किये जाने के बाद सेना ने लोगों को सहायता मुहैया कराने और नव गठित केंद्र शासित प्रदेश में शांति सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष ‘‘पहुंच अभियान’’ (मिशन रीच आउट) शुरू किया है। सेना के एक अधिकारी ने कहा कि यह अभियान सेना द्वारा जम्मू कश्मीर में पिछले तीन दशकों से निवासियों का दिल जीतने और युवाओं को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से दूर रखने के लिए चलायी जा रही विविध गतिविधियों में जुड़ गया।

जम्मू में सेना के पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने कहा कि सेना ने चुनौतीपूर्ण स्थिति के बावजूद अपने अभियान ‘सद्भावना’ के तहत अपना जनता के अनुकूल गतिविधियां जारी रखी हैं। उन्होंने कहा कि पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त किये जाने के बाद ‘पहुंच अभियान’ शुरू किया गया था जिसके बाद इन गतिविधियों को और तेज कर दिया गया। उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘कोई भी क्षेत्र ले लीजिये, सेना सबसे आगे रहकर स्थानीय लोगों, छात्रों की मदद कर रही है, बेरोजगार युवाओं को उनका लक्ष्य हासिल करने में सहयोग कर रही है, खेल कार्यक्रम आयोजित करके खिलाड़ियों के कौशल को धार दे रही है, साम्प्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रही है तथा लोगों को उनके दरवाजे पर चिकित्सकीय सहायता मुहैया करा रही है।’’

उन्होंने यद्यपि पूरे वर्ष पाकिस्तान द्वारा घुसपैठ के लिए नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अक्सर किये जाने वाले संघर्षविराम उल्लंघनों के चलते तनाव के बावजूद सेना ने सीमाओं पर निगरानी बढ़ायी और लोगों तक पहुंच बनाने पर ध्यान केंद्रित रखा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस वर्ष सीमाओं पर संघर्षविराम उल्लंघन की 2500 से अधिक घटनाएं हुईं जिसमें 36 भारतीय नागरिकों की जान चली गई। पुलवामा जिले में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकवादी हमले के जवाब में 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर को वायुसेना के लड़ाकू विमानों द्वारा नष्ट किये जाने के बाद संघर्षविराम उल्लंघन बढ़ गए हैं।

लेफ्टिनेंट कर्नल आनंद ने कहा कि सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के नेतृत्व में शीर्ष सैन्य कमांडरों ने केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख के सभी सेक्टरों में कई बार अग्रिम चौकियों का दौरा किया है और सैनिकों की संचालन तैयारियों की समीक्षा की। सेना के पीआरओ ने कहा कि अगस्त में ‘मिशन रीच आउट’ शुरू होने के बाद सेना ने पूरे जम्मू कश्मीर में नागरिक कार्यक्रमों को तेज किया।

सेना के पीआरओ ने कहा कि अगस्त में "मिशन रीच आउट" की शुरुआत के साथ, सेना ने जम्मू-कश्मीर में अपने नागरिक कार्यक्रमों को तेज किया ताकि शांति सुनिश्चित हो और असामाजिक और राष्ट्र-विरोधी तत्वों द्वारा जनता को गुमराह न किया जा सके। लेफ्टिनेंट कर्नल आनंद ने कहा कि सेना 43 सद्भावना पब्लिक स्कूल चला रही है, जहां 15,000 छात्र नामांकित हैं, साथ ही तीन विशेष प्रशिक्षण-सह-कोचिंग केंद्र भी संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेना ने युवाओं के लिए 120 से अधिक खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की हैं।  

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