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सेना प्रमुख बिपिन रावत ने अफस्पा पर दिया बड़ा बयान, कहा-पुनर्विचार का यह सही समय नहीं

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: January 28, 2018 19:44 IST

जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर विवादित इलाकों में मौजूदा हालात को देखते हुए उन्होंने साफ कहा कि अभी वह समय नहीं आया है।  

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आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने रविवार को जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के विवादित राज्यों में लागू आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (AFSPA) पर पुनर्विचार की संभावनाओं को खारिज कर दिया है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर विवादित इलाकों में मौजूदा हालात को देखते हुए उन्होंने साफ कहा कि अभी वह समय नहीं आया है।  सेना प्रमुख ने कहा कि ' मुझे नहीं लगता कि अभी वह समय आया है जब अफस्पा पर फिर से विचार किया जाए।' उन्होंने कहा कि अफस्पा के कुछ मजबूत प्रावधान हैं, सेना दूसरे नुकसान को लेकर चिंतित रहती है और यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि कानून के तहत इसके संचालन से स्थानीय लोगों को कोई असुविधा ना हो।

बता दें कि अफस्पा सेना को जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के विवादित इलाकों में सुरक्षा बलों को विशेष सुरक्षा अधिकार देता है। इस एक्ट को लेकर विवाद है।  वहीं इसके दुरुपयोग का आरोप लगाकर काफी समय से इसे हटाने की मांग की जाती रही है। जम्मू-कश्मीर में बीजेपी की गठबंधन से सरकार चला रही पीडीपी और नैशनल कॉन्फ्रेंस जैसे पोलिटिकल पार्टियां और सिविल राइट एक्टिविस्ट्स अफस्पा हटाने की मांग कर रहें हैं। लेकिन जनरल रावत के बयान से यह साफ हो गया है कि फिलहाल अफस्पा जारी रहेगा। आर्मी चीफ ने यह भी कहा कि, हर लेवल पर कई मुश्किल ऑपरेशंस के लिए सेना के अलग नियम होते हैं। इस बात का जरूर ख्याल रखा जाता है कि कहीं लोगों को इससे परेशानी न हो।' सेना की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, 'हमारी सेना का काफी अच्छा मानवाधिकार रिकॉर्ड रहा है।' पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से आतंकवाद से निपटने की रणनीति वाले सवाल पर आर्मी चीफ ने कहा कि आर्म्ड फोर्सेज के पास कई प्रकार के ऑपरेशंस करने के लिए ऑप्सन मौजूद हैं। लेकिन इसका खुलासा नहीं किया जा सकता है क्योंकि इससे दुश्मन सावधान हो सकता है।' आर्मी चीफ ने बताया कि हमारी सभी खुफिया एजेंसियां और सुरक्षा बल मिलकर काम कर रहे हैं। सभी में अच्छा तालमेल है। 

आपको बता दें कि पिछले साल से ही सेना ने जम्मू-कश्मीर में काफी सख्त आतंक विरोधी नीति अपनाई है। चलते इससे आतंकवादियों के हौसले पस्त हुए हैं इसके साथ ही पाकिस्तान के संघर्षविराम उल्लंघन का मुंहतोड़ जवाब भी दिया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों की बात करें तो 2017 में पाकिस्तान की ओर से 860 बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया गया लेकिन इसके एक साल पहले संख्या 221 थी। 

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