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बिहार में कोरोना के कहर के बीच चमकी बुखार का प्रकोप, साढ़े तीन साल के बच्चे की मौत

By एस पी सिन्हा | Updated: March 30, 2020 14:58 IST

इस साल बिहार में एईएस से यह मौत का पहला मामला है. एईएस को लेकर सभी को अलर्ट कर दिया गया है. बिहार में हर साल इस बीमारी से कई बच्चों की मौत होती है.

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ठळक मुद्देमुजफ्फरपुर जिले में चमकी बुखार से साढ़े तीन साल के बच्चे की मौतपिछले साल इस बीमारी ने प्रदेश में करीब 200 बच्चों की जान ले ली थी

बिहार में कोरोना वायरस से हुई दो मौतों के बाद अब मुजफ्फरपुर जिले में चमकी बुखार से पीड़ित एक बच्चे की मौत ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है. एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से पीड़ित बच्चे को इलाज के लिए एसकेएमसीएच अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी रविवार रात मौत हो गई. मृतक का नाम आदित्य था और उसकी उम्र साढे 3 साल बताई जाती है. वह मुजफ्फरपुर के सकरा का रहने वाला था. 

उल्लेखनीय है कि बिहार में हर साल इस बीमारी से कई बच्चों की मौत होती है. इस बीमारी की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले साल इस बीमारी ने प्रदेश में करीब 200 बच्चों की जान ले ली थी.

एसकेएमसीएच के पीआइसीयू वार्ड संख्या दो में भर्ती एईएस के इस तीन वर्षीय मरीज आदित्य कुमार की स्थिति गंभीर होने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था.  इसी अस्पताल में इलाजरत एईएस से पीडित पांच वर्षीय सपना कुमारी की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है. 

बिहार में चमकी बुखार से इस साल पहली मौत

इस साल बिहार में एईएस से यह मौत का पहला मामला है. एईएस को लेकर सभी को अलर्ट कर दिया गया है. पिछले साल इस बीमारी की भयावहता के बाद राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा मिलकर काम करने की दिशा में कदम उठाए गए थे. इस बीच गर्मी आने से पहले ही इस बीमारी की दस्तक और बच्चे की मौत ने स्वास्थ्य विभाग और उसकी तैयारियों पर बडा प्रश्नचिह्न खडा कर दिया है. 

इस साल बिहार में एईएस से यह मौत का पहला मामला है और एईएस को लेकर सभी को अलर्ट कर दिया गया है.

मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी ने बताया कि एईएस यानि चमकी बुखार से निपटने के लिए एसकेएमसीएच में 100 बेड के पीआईसीयू वार्ड का निर्माण लॉकडाउन को लेकर रुक गया था. ठेकेदार से बातचीत की गई है. उसे प्रशासनिक सहयोग दिया जाएगा. उसे निर्माण कार्य शुरू करने को कहा गया है. 

उन्होंने कहा कि एसकेएमसीएच में चमकी बुखार से जुडे संसाधन उपलब्ध हैं. पीएचसी लेवल पर भी पीआईसीयू वार्ड खोला गया है. पीएचसी के डॉक्टर और पारामेडिकल स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई है. वहीं, शिवम के पिता ने बताया कि स्नान और खाने के बाद बुखार और चमकी शुरू हो गई. उल्टी होने लगी. पीएचसी के डॉक्टर ने एसकेएमसीएच रेफर कर दिया. जहां इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई.

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