पटनाः महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का एक प्लेन हादसे में निधन होने के बाद बिहार के सियासी गलियारे में भी मर्माहत देखी जा रही है। अभी पिछले ही साल बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए अजीत पवार पटना आये थे। इस दौरान उन्होंने बिहार में भी अपने पार्टी पदाधिकारियों से पार्टी के विस्तार के संबंध में चर्चा की थी। ऐसे में महाराष्ट्र की सियासत में अपना सिक्का जमाने वाले अजीत पवार का बिहार में अपनी पार्टी को मजबूत करने का सपना अधूरा ही रह गया। अजित पवार ने पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई थी।
महाराष्ट्र में भाजपा के साथ मिलकर सरकार चलाने के बावजूद उन्होंने बिहार चुनाव में एनडीए के खिलाफ ही अपने उम्मीदवार उतारे थे। अजित पवार ने बिहार चुनाव में कुल 15 सीटों पर अपने उम्मीदवार थे, जिनमें से 13 सीटों पर उनके प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। चुनाव आयोग के डाटा के मुताबिक, बिहार चुनाव में अजित पवार की पार्टी को सिर्फ 0.03 फीसदी वोट ही मिले थे।
इतना ही नहीं एनसीपी का प्रदर्शन इतना खराब रहा कि पार्टी के अधिकतर उम्मीदवार एक हजार वोट का आंकड़ा भी पार नहीं कर सका था। व्यक्तिगत प्रदर्शन की बात करें तो मनिहारी से एनसीपी प्रत्याशी सैफ अली खान को सबसे ज्यादा 2057 वोट मिले थे।
वहीं सासाराम में एनसीपी के आशुतोष सिंह को 212 वोट मिले थे, जबकि नोटा को 369 वोट मिले थे। इसी तरह से नौतन में एनसीपी उम्मीदवार जयप्रकाश को महज 186 वोट मिले थे। परसा में बिपिन सिंह को 435, महुआ में अखिलेश ठाकुर को 643 और राघोपुर में अनिल सिंह को 602 वोट ही मिले थे।
आज उनके निधन की खबर मिलने के बाद पार्टी के प्रदेश कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ रहा। बिहार के नेता मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं। उल्लेखनीय है कि अपने 45 साल के सियासी सफर में अजित पवार एक बार सांसद और सात बार विधायक चुने गए थे।