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राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में NOTA से भी हार गई AAP, जमानत नहीं बचा सके केजरीवाल के उम्मीदवार!

By आदित्य द्विवेदी | Updated: December 11, 2018 16:46 IST

यही हाल समाजवादी पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र और सपाक्स जैसी पार्टियों का हुआ है। चुनाव आयोग के 4 बजे तक के आंकड़े के मुताबिक आम आदमी पार्टी NOTA से भी हार गई है।

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दो दलीय राजनीति वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में तीसरी शक्ति बनने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी की करारी हार हुई है। उनके अधिकांश प्रत्याशी जमानत भी नहीं बचा सके। इन राज्यों में पहली बार दस्तक देने वाली आम आदमी पार्टी के वोट शेयर NOTA से कम है। मध्य प्रदेश में आम आदमी पार्टी ने 208 स्थानों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। यही हाल समाजवादी पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र और सपाक्स जैसी पार्टियों का हुआ है। चुनाव आयोग के 4 बजे तक के आंकड़े के मुताबिक आम आदमी पार्टी NOTA से भी पिछड़ रही है।

राजस्थान चुनाव की स्थितिः-

चुनाव आयोग के मुताबिक राजस्थान में आम आदमी पार्टी को 0.4 प्रतिशत वोट मिले हैं वहीं 1.4 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया है। आम आदमी पार्टी को शाम 4 बजे तक कुल 1,17,036 वोट हासिल हुए हैं।

मध्य प्रदेश चुनाव की स्थितिः-

चुनाव आयोग के मुताबिक मध्य प्रदेश में आम आदमी पार्टी को 0.7 प्रतिशत वोट मिले हैं वहीं 1.5 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया है। आम आदमी पार्टी को चार बजे तक 1,58,462 वोट हासिल हुए हैं।

छत्तीसगढ़ चुनाव की स्थितिः-

चुनाव आयोग के मुताबिक मध्य प्रदेश में आम आदमी पार्टी को 0.9 प्रतिशत वोट मिले हैं वहीं 2.2 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया है। आम आदमी पार्टी को अभी तक सिर्फ 61,297 वोट मिले हैं।

आम आदमी पार्टी ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले माहौल तो खूब बनाया, मगर जमीनी हकीकत पर अंतिम दौर यह दल कमजोर नजर आया। इसके चलते पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मध्यप्रदेश में चुनाव प्रचार से दूरी बनाई। वैसे चुनाव के पहले केजरीवाल ने इंदौर में बड़ी सभा कर पार्टी का मुख्यमंत्री का चेहरा आलोक अग्रवाल को घोषित किया।

इसके बाद ऐसा लगा था कि केजरीवाल प्रदेश में सक्रिय होंगे, मगर जब उन्हें संगठनात्मक कमजोरी की जानकारी मिली तो पार्टी के दूसरे नेताओं को जिम्मेदारी सौंपकर उन्होंने प्रदेश से दूरी बना ली। आप ने युवा प्रत्याशियों पर दाव खेला है, कुछ स्थानों पर उसे भाजपा और बसपा के नाराज लोगों का भी साथ मिला, मगर यह दल जमीन स्तर पर ताकत नहीं दिखा पाया।

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