90% ration cards cancelled in Jharkhand genuine: Study | झारखंड में 2017 में रद्द किए गए 90 फीसदी राशन कार्ड वास्तविक थे, रिसर्च में और भी कई खुलासे
झारखंड में 2017 में रद्द किए गए 90 फीसदी राशन कार्ड वास्तविक थे, रिसर्च में और भी कई खुलासे

Highlightsरांची में मीडिया के सामने जारी किये गए अध्ययन में 2016 से 2018 के बीच राज्य के दस जिलों में राशन कार्ड रद्द किये जाने की पड़ताल की गई।राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार ने राज्य में भुखमरी से मौत की खबरों का खंडन किया था। अध्ययन में कहा गया है कि लगभग 4,000 राशन कार्डों की पड़ताल में सामने आया है कि उनमें से केवल 10 प्रतिशत राशन कार्ड ही ऐसे थे, जिनके धारकों का पता नहीं चल पाया है।

 झारखंड के 24 में से 10 चुनिंदा जिलों में किये गए अध्ययन में पाया गया है कि राज्य सरकार ने तीन साल के दौरान जो राशन कार्ड रद्द किये उनमें से 90 प्रतिशत वास्तविक थे। अध्ययन अब्दुल लतीफ जमील पोवर्टी एक्शन लैब (जे-पीएएल) ने किया है, जिसके सह संस्थापक 2019 में अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी इश्तर डुफलो हैं। अध्ययन में कहा गया है कि लगभग 4,000 राशन कार्डों की पड़ताल में सामने आया है कि उनमें से केवल 10 प्रतिशत राशन कार्ड ही ऐसे थे, जिनके धारकों का पता नहीं चल पाया है।

अर्थशास्त्रियों कार्तिक मुरलीधरन, पॉल नीहॉस और संदीप सुखतांकर के इस अध्ययन में दावा किया गया है, ''2017 में लाखों राशन कार्डों को बिना उनके धारकों की सूचित किये रद्द कर दिया गया।'' रांची में मीडिया के सामने जारी किये गए अध्ययन में 2016 से 2018 के बीच राज्य के दस जिलों में राशन कार्ड रद्द किये जाने की पड़ताल की गई।

अध्ययन में कहा गया है कि राज्य सरकार का दावा है कि अधिकतर राशन कार्ड ''फर्जी'' थे। अध्ययन में पिछली सरकार की 27 मार्च 2017 को जारी प्रेस विज्ञप्ति का हवाला देते हुए कहा गया है, ''वे सभी राशन कार्ड जिन्हें आधार संख्या से जोड़ा नहीं गया है, वे 5 अप्रैल को शून्य हो जाएंगे... लगभग तीन लाख राशन कार्ड अवैध घोषित किए गए हैं।''

22 सितंबर, 2017 को, तत्कालीन राज्य सरकार ने एक पुस्तिका में कहा था, “आधार नंबरों के साथ राशन कार्डों को जोड़ने का काम शुरू हो गया है। इस प्रक्रिया में 11.64 लाख राशन कार्ड फर्जी पाए गए हैं। ''इसके जरिये, राज्य सरकार ने एक वर्ष में 225 करोड़ रुपये की बचत की है जो अब गरीब लोगों के विकास के लिए उपयोग की जा सकती है। 99 प्रतिशत राशन कार्ड आधार के साथ अंकित किए गए हैं।''

अध्ययन में कहा गया है कि 10 नवंबर 2017 को राज्य सरकार के खाद्य विभाग ने स्पष्टीकरण दिया था कि रद्द किये गए राशन कार्डों की संख्या वास्तव में 6.96 लाख है, न कि 11 लाख। खाद्य विभाग ने उन्हें फर्जी करार दिया था।

अध्ययन में दावा किया गया है कि राशन कार्ड रद्द किया जाना "भुखमरी से मौतों" का कारण बना। इसमें 11 वर्षीय लड़की संतोषी कुमारी का उदाहरण दिया गया है, जिसकी सितंबर 2017 में सिमडेगा जिले में कथित रूप से भुखमरी से मौत हो गई थी। उसके परिवार का राशन कार्ड आधार कार्ड के साथ लिंक न होने के कारण रद्द कर दिया गया था।

हालांकि, राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार ने राज्य में भुखमरी से मौत की खबरों का खंडन किया था। अध्ययन के मुताबिक 2016 से 2018 के बीच दस चुनिंदा जिलों में जो 1.44 लाख राशन कार्ड रद्द किये गए वे उन जिलों के कुल राशन कार्डों की संख्या का छह प्रतिशत थे। झारखंड के नियोजन, वित्त, खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि "डुप्लीकेट कार्ड" को रद्द करने के लिए सत्यापन कार्य जारी है और, अगर वास्तविक लोगों के पास कार्ड नहीं हैं, तो उनके नाम शामिल किए जाएंगे।

उन्होंने कहा, ''सत्यापन का काम चल रहा है। लगभग पांच लाख संदिग्ध राशन कार्ड और कई डुप्लिकेट कार्ड हैं जिनका उपयोग कभी भी खाद्यान्न खरीदने के लिए नहीं किया गया है।'' मंत्री ने कहा, ''राशन कार्ड सूची में उन लोगों के नाम जोड़े जाएंगे, जिनके राशन कार्ड रद्द किए गए थे। खाद्य सुरक्षा अधिनियम को सख्ती से लागू किया जाएगा।'' 

Web Title: 90% ration cards cancelled in Jharkhand genuine: Study
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