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देश की निचली अदालतों में 10 साल से अधिक पुराने करीब 24 लाख मामले लंबित

By भाषा | Updated: November 24, 2019 15:48 IST

लोकसभा में दिया कुमारी, लाकेट चटर्जी, निशिकांत दूबे, पंकज चौधरी के सवाल के लिखित जवाब में विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से पेश राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रीड के आंकड़ों के अनुसार, ‘‘ वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में 59,867 मामले लंबित हैं जबकि उच्च न्यायालय में 44, 76,625 मामले तथा जिला एवं निचली अदालतों में 3,14,53,555 मामले लंबित हैं । ’

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ठळक मुद्देदेश के न्यायालयों में करीब 3.59 करोड़ मामले लंबित हैं । देश की निचली एवं जिला अदालतों में 3.14 करोड़ मामले लंबित हैं

देश की निचली एवं जिला अदालतों में 3.14 करोड़ मामले लंबित हैं जिसमें से करीब 14 प्रतिशत मामले 10 साल या इससे अधिक पुराने हैं । इसमें से 10 साल से अधिक पुराने सर्वाधिक मामले क्रमश: उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा, गुजरात में लंबित हैं ।

लोकसभा में दिया कुमारी, लाकेट चटर्जी, निशिकांत दूबे, पंकज चौधरी के सवाल के लिखित जवाब में विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से पेश राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रीड के आंकड़ों के अनुसार, ‘‘ वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में 59,867 मामले लंबित हैं जबकि उच्च न्यायालय में 44, 76,625 मामले तथा जिला एवं निचली अदालतों में 3,14,53,555 मामले लंबित हैं । ’

’ इस प्रकार से देश के न्यायालयों में करीब 3.59 करोड़ मामले लंबित हैं । राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रीड के आंकड़ों के अनुसार, देश की निचली एवं जिला अदालतों में 3.14 करोड़ मामले लंबित हैं जिसमें से करीब 14 प्रतिशत यानि 23,90,715 मामले 10 साल या इससे अधिक पुराने हैं ।

इसमें से उत्तर प्रदेश में 10 साल से अधिक पुराने 9,43,935 मामले लंबित हैं जबकि बिहार में 377250 महाराष्ट्र में 250095, पश्चिम बंगाल में 286443, ओडिशा में 175409, गुजरात में 175439, राजस्थान में 48437 मामले 10 साल या उससे अधिक पुराने हैं और लंबित हैं ।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन को बताया कि देश के सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से आग्रह किया गया है कि वे अपने यहां की अदालतों में लंबित पड़े 10 साल या इससे अधिक पुराने मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करें। 50 फीसदी से ज्यादा सजा काट चुके लोगों को जेल से बाहर निकालने से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। 25 फीसदी सजा काट चुकी महिला कैदियों को भी छोड़ा जाना चाहिए। 

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