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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में भूस्खलन में 10 व्यक्तियों की मौत, 13 बचाए गए

By भाषा | Updated: August 11, 2021 20:39 IST

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शिमला, 11 अगस्त हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में बुधवार को एक बस और अन्य वाहनों के भूस्खलन की चपेट में आने से दस लोगों की मौत हो गई तथा 13 अन्य को बचा लिया गया जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका है। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।

किन्नौर जिला उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने कहा कि मलबे से अब तक दस शव निकाले जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मलबे में फंसे कई अन्य लोगों का पता लगाने के लिए बचाव अभियान जारी है।

राज्य आपदा प्रबंधन निदेशक सुदेश कुमार मोख्ता ने बताया कि किन्नौर जिले में निचार तहसील अंतर्गत निगुलसारी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या पांच पर चौरा गांव में दोपहर के समय भूस्खलन और पहाड़ से पत्थर गिरने की घटना हुई।

उन्होंने कहा कि एक यात्री वाहन, एक टाटा सूमो के मलबे में दबे होने का पता चला और उसमें आठ लोग मृत पाए गए।

मोख्ता ने कहा कि हिमाचल सड़क परिवहन निगम (एचआरटीसी) की एक बस, जो दुर्घटना के समय रिकांग पियो से शिमला होते हुए हरिद्वार जा रही थी, अभी भी यात्रियों के साथ मलबे में दबी हुई है।

अधिकारियों ने कहा कि एक कार आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि एक अन्य पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। उन्होंने बताया कि बचाव दल क्रेन की मदद से उन्हें मलबे से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पत्थर गिरने से एक ट्रक नदी किनारे लुढ़क गया और चालक का शव बरामद कर लिया गया है।

इससे पहले, भावनगर के थानाप्रभारी ने कहा कि लगभग 25 से 30 लोग मलबे में दबे हुए हैं।

राज्य के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि मरने वालों में पांच महिलाएं और एक बच्चा शामिल है।

मोख्ता ने बताया कि मृतकों में से दो की पहचान शिमला जिले के रामपुर के कैया गांव निवासी रोहित कुमार (25) और हमीरपुर जिले के सुजानपुर के झोल गांव निवासी विजय कुमार (32) के रूप में हुई है।

एसएचओ ने कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नूरपुर से एनडीआरएफ को तलाशी एवं बचाव अभियान चलाने के लिए बुलाया है।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी, स्थानीय पुलिस के सदस्य, होमगार्ड, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, त्वरित प्रतिक्रिया दल (पुलिस) और चिकित्सा दल सहित खोज और बचाव दल घटना स्थल पर हैं।

उन्होंने कहा कि दस एम्बुलेंस, चार अर्थ मूवर, आईटीबीपी की 17वीं बटालियन के 52 जवान, पुलिस के 30 जवान और एनडीआरएफ के 27 जवान बचाव अभियान में लगे हुए हैं।

इससे पहले, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राज्य विधानसभा को बताया कि ऐसी खबरें हैं कि मलबे के नीचे 50-60 लोगों के फंसे होने की आशंका है, लेकिन सही संख्या का पता नहीं चल पाया है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनसे बात की है और अब तक की सर्वोच्च प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बचाने और उन्हें सर्वोत्तम संभव उपचार प्रदान करना है।

इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ठाकुर से बात की।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से किन्नौर में हुए भूस्खलन के चलते बनी स्थिति पर बात की। प्रधानमंत्री ने जारी बचाव अभियानों में हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया।’’

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने भी भूस्खलन के कारण उत्पन्न स्थिति का जायजा लेने के लिए ठाकुर से बात की। गृह मंत्री ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को राहत एवं बचाव कार्यों में हिमाचल प्रदेश सरकार को हरसंभव मदद देने का निर्देश दिया।

ठाकुर ने विधानसभा को यह भी बताया कि सेना के एक अधिकारी ने उनसे बात की और मदद की पेशकश की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बचाव अभियान के लिए एक हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने कहा कि भूस्खलन तब हुआ जब उस समय इलाके में बारिश नहीं हुई थी।

अधिकारियों ने घायलों की पहचान बिलासपुर के हिमाचल सड़क परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बस चालक महिंदर पाल, मंडी के बस कंडक्टर गुलाब सिंह, प्रशांत, वरुण मेनन (दोनों ऊना से), हमीरपुर के राजेंद्र, किन्नौर के दौलत, शोरंग परियोजना चालक एवं पंजाब के फतेहगढ़ साहिब निवासी चरण जीत सिंह, नेपाल की सवीन शर्मा, शिमला के रामपुर की जप्ती देवी (60), किन्नौर के पूह के चंद्र ज्ञान, रामपुर के अरुण (33), अनिल कुमार (19) और किन्नौर के मूरांग निवासी कैजांग नेगी के तौर पर की है।

अधिकारियों ने कहा कि घायलों को भावनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

इससे पहले दिन में, उपायुक्त सादिक ने पीटीआई-भाषा को बताया कि 40 से अधिक यात्रियों को ले जा रही एचआरटीसी की बस सहित कई वाहन मलबे में दब गए है।

इस मानसून के मौसम में राज्य में भूस्खलन में कई लोगों की मौत हो चुकी है।

इससे पहले 25 जुलाई को किन्नौर जिले के सांगला-छितकुल मार्ग पर बटसेरी के पास हुए कई भूस्खलनों में नौ लोगों की मौत हो गई थी और तीन अन्य घायल हो गए थे।

इसी तरह 27 जुलाई को लाहौल-स्पीति जिले के उदयपुर में तोजिंग नाले पर बादल फटने से अचानक आई बाढ़ में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई थी, दो अन्य घायल हो गए थे और दो लापता हो गए थे।

जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने 4 अगस्त को राज्य विधानसभा को सूचित किया था कि हिमाचल प्रदेश में इस मानसून मौसम में कुल 218 लोगों की मौत हुई है और 12 लोग लापता हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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