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रासायनिक उर्वरकों से कैंसर होने की कोई बात सामने नहीं आई :तोमर

By भाषा | Updated: July 2, 2019 15:55 IST

पंजाब की कैंसर रजिस्ट्री के हवाले से कहा है कि राज्य में प्रति एक लाख लोगों के कैंसर के रोगियों की संख्या 100-110 है जो लगभग राष्ट्रीय औसत के समान है।

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केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों से कैंसर होने की कोई बात अनुसंधानों में सामने नहीं आई है तथा कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने के लिए सरकार अनेक प्रयास कर रही है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में प्रश्नकाल में कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अन्य संस्थाओं में लगातार हो रहे अनुसंधानों में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है कि रासायनिक खादों से कैंसर होता है। 

उन्होंने इस संबंध में कांग्रेस के रवनीत सिंह और आम आदमी पार्टी के भगवंत मान के प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह बात कही। तोमर ने कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों से कैंसर होने की बात अनुसंधान के बाद ही कही जा सकती है, बिना किसी अनुसंधान के केवल भाषणों में ऐसा कह देना ठीक नहीं है। 

उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने पंजाब की कैंसर रजिस्ट्री के हवाले से कहा है कि राज्य में प्रति एक लाख लोगों के कैंसर के रोगियों की संख्या 100-110 है जो लगभग राष्ट्रीय औसत के समान है। तोमर ने लिखित उत्तर में कहा कि पंजाब सरकार ने भी सूचित किया है कि उर्वरत की खपत का पंजाब में कैंसर की बीमारी के प्रसार से कोई संबंध नहीं है। 

उन्होंने कहा कि कीटनाशक और रासायनिक खादें सही मात्रा में, सही समय पर और सही प्रकार से दी जाएं तो इनसे नुकसान नहीं होता। तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार मिट्टी की जांच के लिए किसानों को सॉइल कार्ड भी देती है ताकि किसान अपनी मिट्टी की जांच कराके पता लगा सकें कि उसमें किस हिसाब से खाद और कीटनाशक दिये जा सकते हैं। 

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना में हिस्सा नहीं लिया है जिसके तहत रोगी कैंसर का भी इलाज करा सकते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे पंजाब सरकार को आयुष्मान भारत योजना में शामिल होने को कहें।'  

पंजाब से सांसद और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने दावा किया कि उनके संसदीय क्षेत्र भठिंडा में कैंसर निदान और अनुसंधान के लिए एक केंद्र शुरू किया गया था लेकिन मौजूदा राज्य सरकार ने उसे अनुदान देना बंद कर दिया है।

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